नरक चौदस और रूप चतुर्दशी 2025: बुराई पर अच्छाई की जीत और यमदीप दान का पर्व

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चौदस एवं रूप चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को पड़ेगी। ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ दुबे के अनुसार चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 1:41 बजे से प्रारंभ होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 2:39 बजे समाप्त होगी। इस वर्ष नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और यमदीप दान तीनों पर्व एक ही दिन 19 अक्टूबर को मनाए जाएंगे।

यम दीपदान का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन यम देव की पूजा और दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन शाम के समय यम दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। दीपक जलाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं — दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए क्योंकि यह यमराज की दिशा मानी जाती है। चौमुखी मिट्टी का दीपक सबसे शुभ माना गया है। इसमें सरसों का तेल भरकर चार बत्तियां लगाई जाती हैं, जो जीवन के चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक है।

पौराणिक कथा: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस नरकासुर ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। देवता और मनुष्य सभी उससे त्रस्त हो गए थे। चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और 16,000 कन्याओं को बंधन से मुक्त कराया। इसी कारण इस दिन को ‘नरक चौदस’ और ‘रूप चौदस’ के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और प्रकाश के अंधकार पर विजय का प्रतीक है।

रूप चौदस पर अभ्यंग स्नान का महत्व

ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ दुबे के अनुसार नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का विशेष धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है। आयुर्वेद में अभ्यंग को शरीर की शुद्धि और मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी उपाय भी है। इस वर्ष अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त सोमवार 20 अक्टूबर 2025 को रहेगा।

अभ्यंग स्नान मुहूर्त और मंत्र

अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह 05:48 से सुबह 06:53 बजे तक रहेगा। इस दौरान नीचे दिया गया मंत्र बोलना शुभ माना जाता है —

सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।

मान्यता है कि अभ्यंग स्नान न केवल शरीर की शुद्धि करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सौंदर्य और स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है। इसीलिए रूप चौदस को ‘रूप सौंदर्य स्नान दिवस’ भी कहा जाता है।

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