
जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और स्वाशासी कॉलेज प्रभारी प्राचार्य के भरोसे हैं। उच्च शिक्षा विभाग के प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस और स्वाशासी कालेजों में प्राचार्य के पद पर विवाद में उलझे हैं। जिन मामलों में कानूनी निर्णय हो चुके हैं विभाग की तरफ से ऐसे प्रकरण में भी कार्रवाही नहीं हो रही है।
विभाग ने ऐसे संस्थानों में प्रभारी प्राचार्य को तैनात किया है जिनके अस्थायी पद होने से उनकी कार्यप्रणाली ढ़ीली है। शासन के खिलाफ प्राचार्यो की पदस्थापना को लेकर करीब दस मामले न्यायालय तक पहुंचे थे। इसमें तीन प्रकरण में पक्षकार सेवानिवृत्त हो चुके हैं, चार प्रकरण में वरिष्ठता के आधार पर निर्णय हुआ वहीं एक प्रकरण में याचिकाकर्ता की मांग खारिज हुई। इसके बाद भी शासन ने निर्णय के बावजूद मेरिट से चयनित प्राचार्य को पद नहीं दिया।
इस तरह हुआ था चयन- उच्च शिक्षा विभाग ने स्वाशासी और पीएम श्री कालेज आफ एक्सीलेंस में प्राचार्यो की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार और मेरिट की प्रक्रिया की थी। इस प्रक्रिया के बाद कालेजों में चयनित प्राचार्यो को पदस्थ किया गया। कुछ दिन बाद कालेज में पदस्थ वरिष्ठ प्राध्यापकों ने वरिष्ठता का हवाला देकर इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कई को राहत मिली।
उच्च शिक्षा विभाग ने ऐसे निर्णय पर अमल किया और मेरिट के आधार पर चयनित प्राचार्यो को हटाकर उनकी जगह वरिष्ठताक्रम में प्राचार्य बैठाया। एक प्रकरण में न्यायालय की तरफ से याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज किया गया। जिसके बाद भी विभाग ने निर्णय के आधार पर मेरिट पर चयनित प्राचार्य की नियुक्ति नहीं दी।
इन याचिकाओं की कुल संख्या लगभग 10 थी।
इनमें से –
– तीन प्रकरणों के पक्षकार सेवानिवृत्त हो चुके हैं,
– चार प्रकरणों में वरिष्ठता के आधार पर निर्णय आया,
– दो में ओपन काउंसलिंग का आदेश हुआ,
– और एक प्रकरण में शासन के पक्ष में निर्णय हुआ, जहाँ याचिकाकर्ता की मांग खारिज कर दी गई।
जहां शासन जीता, वहां भी पालन नहीं”-
विभागीय सूत्रों के अनुसार, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस प्रकरण में शासन को न्यायालय से राहत मिली, वहाँ भी निर्णय का पालन नहीं किया जा रहा। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।”