
जबलपुर। विश्व हिंदू परिषद गोरक्षा विभाग महाकोशल प्रान्त के ट्रस्ट देसी गोवंश रक्षण एव संवर्धन न्यास एवं जेएनकेवी विश्व विद्यालय के संयुक्त तत्वधान में दो दिवसीय कार्यशाला आज प्रातः 11:00 बजे सुनील मानसिंह केंद्रीय मंत्री की प्रस्तावना के साथ आरंभ की गई। उन्होंने देशी गोवंश के नस्ल सुधार और संरक्षण करने व हर घर में देसी गाय के पालन का आव्हान भी किया।
पंचगव्य का महत्व
इस अवसर पर गुरु प्रसाद सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष गो संवर्धन बोर्ड ने कहा की हमारे देशी गोवंश के महत्व का पंचगव्य के उपयोग से मानव पूर्णतया स्वस्थ होगा और उसका पेट ठीक रहेगा। पेट ठीक रहेगा तो मन मस्तिष्क दोनों सुधरेंगे और प्रकृति की रक्षा हेतु देशी गोवंश का महत्व समझकर उसको संरक्षित करना आने वाली पीढ़ी के स्वस्थ सुरक्षित भविष्य के हिसाब से बहुत ही आवश्यक है।

अतिथियों ने ये कहा
विज्ञप्ति जारी कर प्रांताध्यक्ष गोरक्षा डॉ गावस्कर वार्ले व सत्येंद्र सिंह ने बताया कि कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर पी के मिश्रा ने कार्यशाला को संबोधित किया। डॉ मिश्रा ने कहा कि ऐसे गोवंश के संरक्षण और जैविक कृषि के आयोजनों से भारत की आर्थिक दशा और दिशा दोनों बदली जा सकती है। दुनिया हमारे भारत की तरफ बड़ी आशा से देख रही है।
विहिप केंद्रीय मंत्री लाल बहादुर सिंह ने कहा देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, घी, दही, दूध से निर्मित पंचगव्य उत्पादन उद्योगों से रोजगार के नवाचार प्रयोग से भारत आर्थिक रूप से समर्थ और समृद्ध होगा।
क्षेत्र गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा ने सकल समाज से संकल्प सहित आवाहन किया कि सिंगल यूज पॉलिथीन के उपयोग को पूर्ण बंद करना होगा। घर से सामग्री लेने के लिए कपड़े का थैला लेकर निकले तभी गोवंश जीवन बच पाएगा।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में नागपुर से की चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर नंदिनी भोजराज ने बताया कि पंचगव्य उत्पादन के सेवन से घर के स्वास्थ्य बजट को गारंटी से घटाया जा सकता है। साथी हमारी रसोई जो प्राचीन पद्धति अनुसार मसाले से भरपूर है उनका समुचित उपयोग हमारे जीवन की दशा दिशा और स्वास्थ्य तीनों बदल सकता है।
ये थे उपस्थित
कार्यशाला में विहिप के गौ रक्षा केंद्रीय सदस्य वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एम एल केवट, ट्रस्ट के प्रांतमंत्री विनोद शिवहरे, देवेंद्र श्रीवास्तव, संदीप वाधवा, संजय तिवारी, उमेश शुक्ला, वेद प्रकाश अधोलिया के अलावा कृषि वैज्ञानिक, मात्र शक्तियों, आयुर्वेदिक वैद्य, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय व फार्मेसी के छात्र मुख्य रूप से उपस्थित रहे।