Panna Tiger Reserve: पन्ना टाइगर रिजर्व में पहला वन्यजीव-केंद्रित CSR कॉन्क्लेव

कॉर्पोरेट दिग्गजों ने वन्यजीव संरक्षण के लिए दिया सहयोग का भरोसा, CSR पोर्टल का भी शुभारंभ

राकेश कुमार शर्मा

पन्‍ना। पारिस्थितिक प्रबंधन के साथ औद्योगिक विकास को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग और मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी ने पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया। 6 और 7 मार्च को आयोजित दो दिवसीय इस कार्यक्रम ने संरक्षण वित्तपोषण के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।

नीति और संरक्षण नेतृत्व का संगम

कॉन्क्लेव ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नीति निर्माताओं और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव (वन) संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभ रंजन सेन, एपीसीएफ (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति, एपीसीएफ (भूमि प्रबंधन) एच.एस. मोहंता तथा एपीसीएफ एवं चीता प्रोजेक्ट के क्षेत्र संचालक उत्तम शर्मा सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इसके साथ ही राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, मुकुंदपुर चिड़ियाघर और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कॉर्पोरेट जगत की सक्रिय भागीदारी

कॉन्क्लेव में देश की कई प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण के लिए CSR के माध्यम से सहयोग का भरोसा दिया।

प्रतिभागियों में ऊर्जा एवं खनन क्षेत्र से कोल इंडिया, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ग्रीनको और जियोमिन आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड शामिल रहे।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर क्षेत्र से टाटा पावर, एलएंडटी, सुजलॉन, रवि इन्फ्रा बिल्ड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (NCC) ने भागीदारी की। वहीं विनिर्माण और स्थिरता क्षेत्र से जे.के. सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड तथा ईकेआई एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड और वित्त क्षेत्र से आईसीआईसीआई फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

संरक्षण कार्यों का कराया गया प्रत्यक्ष अवलोकन

कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को पन्ना टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण भी कराया गया। सफारी के दौरान उन्होंने एंटी-पोचिंग कैंप, वन सुरक्षा व्यवस्था, 24 घंटे की निगरानी प्रणाली और वन कर्मचारियों की पैदल गश्त का अवलोकन किया।

प्रतिभागियों को घास के मैदानों के पुनरुद्धार, सौर ऊर्जा संचालित बोरवेल के माध्यम से जल प्रबंधन तथा ‘लैंटाना’ और ‘वन तुलसी’ जैसी आक्रामक प्रजातियों को हटाने जैसे वैज्ञानिक पर्यावास प्रबंधन कार्यों की जानकारी भी दी गई।

दौरे के दौरान बाघों का दर्शन इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा, जिससे राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता का अनुभव प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से हुआ।

हिनौता हाथी कैंप का भी किया दौरा

कॉन्क्लेव के दौरान प्रतिनिधियों ने हिनौता स्थित हाथी कैंप का दौरा किया और वन गश्त में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका तथा उनकी देखभाल की व्यवस्थाओं की सराहना की।

CSR दान पोर्टल का शुभारंभ

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण समर्पित CSR दान पोर्टल csr.mptigerfoundation.org का शुभारंभ रहा। अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल पारदर्शिता और सहभागिता को बढ़ावा देगा तथा कॉर्पोरेट जगत को वन्यजीव संरक्षण में डिजिटल माध्यम से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा

वन विभाग और टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी की इस पहल को संरक्षण के लिए संसाधन जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों के साथ CSR को जोड़ते हुए मध्य प्रदेश पर्यावरण संरक्षण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक मजबूत मॉडल स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कॉन्क्लेव का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि देश की आर्थिक प्रगति और वन्य क्षेत्रों की पारिस्थितिक सुरक्षा एक साथ आगे बढ़ें।

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