वॉटर मैनेजमेंट के लिए बरगी डैम से छोड़ा जा रहा आधा पानी, मानसून सक्रिय होगा तो मिलेगी राहत

जबलपुर। वॉटर मैनेजमेंट जरूरी है तभी जरूरत के वक्त पानी की आपूर्ति निर्बाध तरीके से संभव होती है। बरगी डैम में फिलहाल यही तरीका अपनाया जा रहा है। इसका कारण यह है कि मानसून अभी तक ओझल है। हालांकि इसके बाद भी बरगी डैम में फिलहाल पेयजल संकट की स्थिति नहीं है। डैम का जलस्तर अभी डेड लेवल से करीब चार मीटर ऊपर बना हुआ है, जिससे जबलपुर शहर, रेलवे और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए जलापूर्ति सामान्य रूप से जारी है। हालांकि जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बांध से फिलहाल आवश्यकता के मुकाबले करीब आधा पानी ही छोड़ा जा रहा है।

डेड लेवल से 3.85 मीटर ऊपर है जलस्तर

जल संसाधन विभाग के अनुसार मंगलवार को बरगी डैम का जलस्तर 407.40 मीटर दर्ज किया गया, जबकि डैम का डेड लेवल 403.55 मीटर है। यानी वर्तमान में डैम में डेड स्टोरेज से लगभग 3.85 मीटर अधिक पानी उपलब्ध है। यही वजह है कि फिलहाल जलापूर्ति को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं है, लेकिन मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए पानी का उपयोग नियंत्रित तरीके से किया जा रहा है।

95 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा

वर्तमान में बरगी जल विद्युत परियोजना के तहत करीब 95 क्यूमेक (घन मीटर प्रति सेकंड) पानी छोड़ा जा रहा है। बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन लगभग छह घंटे टरबाइन संचालित की जा रही हैं। जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ इसी पानी का उपयोग डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी हो रहा है।

पेयजल आपूर्ति पर फिलहाल कोई संकट नहीं

बरगी डैम जबलपुर शहर की पेयजल व्यवस्था की जीवनरेखा है। नगर निगम इसी जलाशय से शहर के अधिकांश हिस्सों में नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति करता है। इसके अलावा रेलवे की जलापूर्ति भी बरगी डैम पर निर्भर है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होता है और जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है तो डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा। फिलहाल उपलब्ध जल भंडारण को देखते हुए पेयजल आपूर्ति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन जल संरक्षण और संतुलित डिस्चार्ज की नीति अपनाई जा रही है।

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