
जबलपुर। श्रीहरि नारायण ने भक्तों के कल्याणार्थ असंख्य बार अवतार लिया है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने मर्यादा में रहकर असुरों का नाश किया और अनुशासन व मर्यादा के साथ परिवार में सेवा कार्य करने की सीख दी।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने लीला पुरुषोत्तम स्वरूप में कंस के कारागार में जन्म लेकर नंद के घर वृंदावन में बाल लीलाओं के माध्यम से संपूर्ण जगत को आनंदित किया। वृंदावन में गोप-गोपियां और गौमाता श्रीकृष्ण से निश्चल भाव से प्रेम करते हैं।

भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट होते हैं भगवान
भक्त की सच्ची भक्ति से प्रभावित होकर भगवान नारायण संपूर्ण जगत में भक्त की पुकार सुनकर प्रकट हो जाते हैं। कर्म की प्रधानता रखते हुए भक्ति करना आवश्यक है।
भागवत कथा के पंचम दिवस दिया संदेश
उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस नंदोत्सव एवं श्रीकृष्ण बाल लीलाओं की कथा के दौरान श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी हाथीताल जबलपुर में संबोधित कर रहे थे।
व्यास पीठ पूजन और आरती
इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण में व्यास पीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती यजमान श्री कपूरचंद्र केसरवानी, हरिवंश निर्मला केसरवानी, नारायण दास शान्ति देवी केसरवानी, कुंजविहारी केसरवानी, हरि शंकर कान्ति केसरवानी, हिंद लाल केसरवानी, शिवदीन केसरवानी, रामरूप (ज्ञानी) रामबाई केसरवानी, कन्हैयालाल केसरवानी, मूलचंद्र शाकुंतला केसरवानी, राम कृपाल केसरवानी, राम दिनेश सेन सुभद्रा सेन, बनवारी लाल गुलाब कली केसरवानी, केदारनाथ गीता केसरवानी, मिश्री लाल शीला केसरवानी, हरिवंश सुनीता केसरवानी, प्रदीप सरोज केसरवानी, प्रेम लाल गुप्ता बेला कली, यमुनी प्रसाद अर्चना केसरवानी ने किया।