
जबलपुर। हमारे जीवन में कर्म और कृपा दोनों महत्वपूर्ण हैं। ईश्वर ने कर्म करने की हमें स्वतंत्रता प्रदान की है और कृपा तो भगवान ही करते हैं। कर्म के साथ ईश्वर कृपा हो तो वह कर्म विश्राम और सुखदायक हो जाता है, जबकि ईश्वर कृपा से रहित कर्म दुखदाई और थकाने वाला हो जाता है।
ईश्वर कृपा पाने का मार्ग
ईश्वर की कृपा उसी को प्राप्त होती है, जो उस कृपा को प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है, जो ईश्वर की आज्ञानुसार चलता है और उनकी प्रसन्नता के लिए कर्म करता है।
श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का उदाहरण
श्रीकृष्ण और सुदामा की घनिष्ठ मित्रता इसका उत्तम उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के जीवन में आने वाले कष्ट और दरिद्रता को हर लिया। सुदामा ने हरि नाम स्मरण करते हुए भगवत पूजन-अर्चन किया और द्वारिका पहुंचे, जहां स्वयं भगवान ने उनका स्वागत कर उनके दुखों का अंत किया।
हरि स्मरण का महत्व
इसलिए मनुष्य को भगवान पर विश्वास रखते हुए सदैव हरि नाम का स्मरण करना चाहिए। यही जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आधार है।
श्रीमद्भागवत कथा में दिए उद्गार
उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस में व्यक्त किए। उन्होंने सुदामा चरित्र, भागवत महात्म्य और परीक्षित मोक्ष की कथा का वर्णन किया।
आयोजन स्थल
यह श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह दुर्गा मंदिर, कैलाशपुरी, हाथीताल, जबलपुर में आयोजित किया जा रहा है।
व्यास पीठ पूजन में सहभागिता
श्रीमद्भागवत महापुराण के अवसर पर व्यास पीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती यजमानों द्वारा की गई, जिसमें गोकुल केसरवानी, विनय केसरवानी, श्री कपूरचंद्र केसरवानी, हरिवंश-निर्मला केसरवानी, नारायण दास-शांति देवी केसरवानी, कुंजविहारी केसरवानी, हरि शंकर-कांति केसरवानी, हिंद लाल केसरवानी, शिवदीन केसरवानी, रामरूप (ज्ञानी)-रामबाई केसरवानी, कन्हैयालाल केसरवानी, मूलचंद्र-शाकुंतला केसरवानी, राम कृपाल केसरवानी, राम दिनेश सेन-सुभद्रा सेन, बनवारी लाल-गुलाब कली केसरवानी, केदारनाथ-गीता केसरवानी, मिश्री लाल-शीला केसरवानी, हरिवंश-सुनीता केसरवानी, प्रदीप सरोज केसरवानी, प्रेम लाल गुप्ता-बेला कली तथा यमुनी प्रसाद-अर्चना केसरवानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।