
जबलपुर। जब किसी नन्हे मासूम को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी घेरती है, तो उसका असर केवल बच्चे पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों और सपनों पर पड़ता है। बीमारी की समय पर पहचान, उचित उपचार एवं आवश्यक सहयोग के अभाव में किसी भी बच्चे की मुस्कान न छिने—इसी मानवीय उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं कैनकिड्स संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जबलपुर में बाल कैंसर की शीघ्र पहचान एवं समुचित प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के चिकित्सकों, ब्लॉक एवं जिला स्तर के कार्यक्रम अधिकारियों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को बच्चों में कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच, समय पर रेफरल तथा उपचार के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक बाल कैंसर की पहचान की व्यवस्था को मजबूत करना तथा चिन्हित बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ना रहा।

विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला का शुभारंभ CMHO डॉ. नवीन कोठारी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर की पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक, DHO डॉ. विनीता उप्पल, डॉ. एस.एस. दाहिया एवं ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल डॉ. धीरज दवांडे द्वारा किया गया।
मुख्य प्रशिक्षक पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता पाठक ने उपस्थित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को बच्चों में होने वाले कैंसर के प्रारंभिक संकेतों एवं लक्षणों की पहचान, शीघ्र चिन्हांकन, आवश्यक जांच, रेफरल प्रक्रिया तथा उपचार के दौरान बच्चों की समुचित देखभाल के संबंध में विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यशाला में जिला प्रबंधक, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) एवं DEIC मैनेजर सुभाष शुक्ला की विशेष सहभागिता रही। श्री शुक्ला ने जिले में RBSK के माध्यम से बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग को बाल कैंसर की शीघ्र पहचान से जोड़ने, चिन्हित बच्चों के समयबद्ध रेफरल तथा विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि RBSK के मैदानी स्वास्थ्य दल जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचते हैं, इसलिए बाल कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचानने और ऐसे बच्चों को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यशाला के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को इस दिशा में और अधिक संवेदनशील एवं दक्ष बनाने का प्रयास किया गया।
कैनकिड्स द्वारा समग्र सहयोग की जानकारी
कैनकिड्स के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ सिंह चौहान ने बच्चों के उपचार के साथ-साथ परिवारों को उपलब्ध कराई जाने वाली समग्र सहायता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा शासन के सहयोग से चिकित्सा एवं उपचार के अतिरिक्त बच्चों की शिक्षा, पोषण, मनोवैज्ञानिक सहयोग तथा “घर से दूर घर” जैसी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है, ताकि कैंसर से जूझ रहे बच्चे और उनके परिवार उपचार की पूरी प्रक्रिया में अकेले न पड़ें।
कार्यशाला में DEIC/RBSK टीम, मेडिकल कॉलेज जबलपुर से डॉ. विद्या कुमारी एवं डॉ. अदिति, DPM जबलपुर, श्वेता, शिवेंद्र सहित जिले के RBSK चिकित्सक, ब्लॉक एवं जिला स्तर के कार्यक्रम अधिकारी तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
बाल कैंसर की समय पर पहचान का लिया संकल्प
कार्यशाला के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने संकल्प लिया कि जबलपुर जिले के अंतिम छोर तक पहुंचकर प्रत्येक संभावित बाल कैंसर के मामले की समय पर पहचान की जाएगी तथा चिन्हित बच्चों को शीघ्र जांच, विशेषज्ञ परामर्श, रेफरल एवं शासन की योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क उपचार से जोड़ा जाएगा।
यह पहल जबलपुर जिले में बाल कैंसर की शीघ्र पहचान एवं समयबद्ध उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बच्चों को समय पर उपचार मिल सके और किसी भी मासूम की जिंदगी केवल बीमारी की देर से पहचान या आर्थिक कठिनाई के कारण प्रभावित न हो।