केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद में हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की 121वीं जयंती खेल दिवस के रूप में आयोजित

विद्युत कंपनियों के कार्मिकों से आह्वान- कम से कम एक घंटा खेल मैदान में बिताएं

जबलपुर। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के तत्वावधान में 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 121वीं जयंती को खेल दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के महासचिव फिरोज कुमार मेश्राम, सचिव कार्यालय नितिन खत्री, सचिव खेल एमसी बालोदी, पूर्व खेल सचिव अनिल अलंग सहित सभी खेल प्रभारियों, खिलाड़ियों, महिलाओं एवं बच्चों ने परिषद के मशाल परिसर में स्थापित मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में मशाल परिसर में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यह मध्य प्रदेश में हॉकी के जादूगर की स्थापित होने वाली पहली प्रतिमा है। खेल दिवस के अवसर पर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने महान हॉकी खिलाड़ी की स्मृतियों को नमन करते हुए खेलों के प्रति समर्पण और फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।

हर कर्मचारी कम से कम एक खेल से जुड़े : मेश्राम

इस अवसर पर उपस्थित जन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के महासचिव फिरोज कुमार मेश्राम ने समस्त विद्युत कंपनियों के कार्मिकों का आह्वान किया कि वे फिट इंडिया मूवमेंट के अनुरूप कम से कम एक घंटा खेल के मैदान में बिताएं। उन्होंने कहा कि खेल दिवस पर केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद का ध्येय एवं संकल्प है कि “हर कर्मचारी वर्ष में कम से कम एक खेल से जुड़े और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करे।”

श्री मेश्राम ने कहा कि वर्तमान जीवनचर्या को देखते हुए प्रत्येक कार्मिक को प्रतिदिन 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि पर सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहिए। नियमित खेल और शारीरिक गतिविधि से कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विद्युत कंपनियों के कार्मिकों से खेल गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

ध्यानचंद का जबलपुर और विद्युत मंडल से रहा गहरा संबंध

कार्यक्रम में जनसंपर्क अधिकारी पंकज स्वामी ने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जबलपुर से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि ध्यानचंद का बचपन जबलपुर में बीता था। ध्यानचंद जब सिर्फ चार वर्ष के बच्चे थे, तब वे पहली बार अपने पिता के बड़े भाई के पास जबलपुर आए थे। उनके छोटे भाई रूप सिंह का जन्म 1908 में जबलपुर में ही हुआ था।

ध्यानचंद का जबलपुर से संबंध उस समय और गहरा हुआ, जब उनकी बहन सुरजा देवी का विवाह वर्ष 1940 में जबलपुर के किशोर सिंह चौहान से हुआ। किशोर सिंह चौहान राइट टाउन में हवाघर नाम के प्रसिद्ध मकान में रहते थे। इस तरह जबलपुर से ध्यानचंद का पारिवारिक और भावनात्मक संबंध लंबे समय तक बना रहा।

1975 में अंतिम बार जबलपुर आए थे ध्यानचंद

जनसंपर्क अधिकारी पंकज स्वामी ने बताया कि जनवरी-फरवरी 1975 में मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के आमंत्रण पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद अखिल भारतीय विद्युत क्रीड़ा नियंत्रण मंडल हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन करने अंतिम बार जबलपुर आए थे। इस दौरान उनका संबंध मध्यप्रदेश विद्युत मंडल और यहां की खेल गतिविधियों से भी जुड़ा रहा।

मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके खेल जीवन, जबलपुर से संबंध और खेलों के प्रति उनके योगदान को याद किया गया। साथ ही वर्तमान पीढ़ी को खेलों से जुड़ने और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संदेश दिया गया।

बड़ी संख्या में खिलाड़ी और कर्मचारी रहे उपस्थित

खेल दिवस आयोजन में कार्यालय प्रभारी संजय आनंद, सह प्रभारी क्रिस्टोफर नरोन्हा, सुमंत मिश्रा, सुनील सिंह, संजय केने, नीरज दुबे, महेंद्र सोनी, रावेन्द्र वर्मा, शेख गुलाम, संतोष द्विवेदी, संजय सिंह, अशोक चौहान, रवीन्द्र अवस्थी, सूर्यभान वर्मा, संजय पोल, सुरेन्द्र इंगले, रोहित कुशवाहा, जुक्त बहादुर, राकेश स्वामी, घनश्याम रान, आरडी प्रजापति, एसके शाह, माधुरी तिवारी, प्रतिभा पटेल, अनीता तिवारी, वैशाली सिंह सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के माध्यम से खेल दिवस को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखते हुए नियमित खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया। केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद ने कर्मचारियों को खेलों से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का संकल्प भी दोहराया।

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