
राकेश कुमार शर्मा
पन्ना। श्रावण मास के पावन अवसर पर श्री 5 पद्मावती पुरी धाम पन्ना, श्री 5 नौतन पुरी धाम जामनगर एवं श्री 5 महा मंगल पुरी सूरत, गुजरात सहित देश-विदेश में स्थित श्री प्राणनाथ एवं श्री कृष्ण प्रणामी मंदिरों में इन दिनों ‘बीतक कथा’ की ज्ञानधारा प्रवाहित हो रही है। पूरे एक माह तक चलने वाले इस आध्यात्मिक आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों एवं विदेशों से सुंदरसाथ, श्रद्धालु एवं साधु-संत पहुंचकर ब्रह्मवाणी के गूढ़ रहस्यों, परमधाम तथा आत्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। भजन, सत्संग और ब्रह्मवाणी के श्रवण से मंदिरों एवं धामों का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर है।

तीनों पुरियों में विद्वानों के मुखारविंद से हो रहा बीतक का दिव्य प्रकाश
श्री 5 पद्मावती पुरी धाम पन्ना स्थित महामति श्री प्राणनाथ जी मंदिर में पंडित दीप राज शर्मा द्वारा बीतक कथा का दिव्य वर्णन किया जा रहा है। वहीं श्री 5 नौतन पुरी धाम जामनगर में चेतन स्वामी जी महाराज तथा श्री पंच महा मंगल पुरी सूरत, गुजरात में गादीपति सूर्य नारायण जी महाराज द्वारा बीतक कथा के माध्यम से सुंदरसाथ एवं श्रद्धालुओं के बीच ब्रह्मज्ञान का दिव्य प्रकाश फैलाया जा रहा है।

निजानंद आश्रम गाजियाबाद में हो रहा है बीतक कथा का दिव्य विवेचन
इसी क्रम में गाजियाबाद स्थित निजानंद आश्रम श्री कृष्ण प्रणामी धाम में महात्मा सुदीप महाराज जी द्वारा बीतक कथा का दिव्य विवेचन किया जा रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को तारतम ब्रह्मवाणी के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों, महामति श्री प्राणनाथ जी की दिव्य लीलाओं तथा परमधाम के ज्ञान से परिचित कराया जा रहा है।
इन सभी पवित्र धामों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सुंदरसाथ, श्रद्धालु एवं साधु-संत कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। बीतक कथा के साथ भजन, सत्संग, चिंतन और ब्रह्मवाणी के श्रवण से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
बीतक—इतिहास नहीं, आत्मजागरण का दिव्य मार्ग
कथा में बताया जा रहा है कि ‘बीतक’ केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि ब्रह्मात्माओं, परमधाम एवं अक्षरातीत परमात्मा की दिव्य लीलाओं का आध्यात्मिक दस्तावेज है। इसके श्रवण, मनन और चिंतन से मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप, जीवन के परम उद्देश्य तथा परमधाम की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्राप्त होता है।
विद्वानों के अनुसार तारतम ब्रह्मवाणी आत्मा को जागृत करने वाला दिव्य ज्ञान है, जो मनुष्य को बाहरी संसार से अंतर्मन की आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाता है।
महामति जी की दिव्य लीलाओं से लेकर महाराजा छत्रसाल के प्रसंगों तक
कथा में विक्रम संवत 1748 में तारतम वाणी के प्राकट्य, श्री महामति प्राणनाथ जी की ध्यान-लीलाओं तथा महाराजा छत्रसाल से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को बताया जा रहा है कि श्री महामति प्राणनाथ जी का संदेश मानव जीवन को आत्मबोध और परमात्मा की अनुभूति की ओर ले जाने वाला है।
श्री लालदास जी ने दिव्य प्रेरणा से रची बीतक
बीतक कथा में श्री लालदास जी द्वारा दिव्य प्रेरणा से संपूर्ण बीतक की रचना किए जाने का भी उल्लेख किया जा रहा है। इसे प्रणामी समाज के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया गया है।
श्रावण शुक्ल पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इसी दिन श्रीजी के सिंहासन पर ब्रह्मवाणी को प्रतिष्ठित किया गया था। इसका संदेश है कि ब्रह्मवाणी श्रीजी का ज्ञानमय स्वरूप है और आध्यात्मिक जीवन में इसका सर्वोच्च महत्व है।
तीन पुरियों में एक माह तक गूंजती है बीतक की ज्ञानधारा
निजानंद संप्रदाय की तीन प्रमुख पुरियों—श्री 5 पद्मावती पुरी धाम पन्ना, श्री 5 नौतन पुरी जामनगर तथा श्री पंच महा मंगल पुरी सूरत, गुजरात—में बीतक कथा का विशेष आयोजन होता है। इन पवित्र धामों में देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अनेक सुंदरसाथ पूरे एक माह तक प्रवास कर कथा, सत्संग एवं ब्रह्मज्ञान का श्रवण करते हुए उसका आत्मसार करते हैं।
तीनों पुरियों के साथ-साथ देश-विदेश में स्थापित श्री प्राणनाथ एवं श्री कृष्ण प्रणामी मंदिरों में भी बीतक कथा और ब्रह्मवाणी के आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किए जा रहे हैं। इससे विश्वभर में फैले प्रणामी समाज में आध्यात्मिक चेतना और ब्रह्मज्ञान की ज्ञानधारा निरंतर प्रवाहित हो रही है।
जन्माष्टमी पर पन्ना में होगा कथा का समापन
श्रद्धालुओं से ब्रह्मवाणी के नियमित अध्ययन, चितवनी एवं आत्मचिंतन का आह्वान किया गया है, ताकि जीवन को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़कर मानव जीवन के परम उद्देश्य को समझा जा सके।
गाजियाबाद स्थित श्री निजानंद आश्रम श्री कृष्ण प्रणामी धाम में बीतक कथा का समापन 3 सितंबर 2026 को होगा, जबकि श्री 5 पद्मावती पुरी धाम पन्ना स्थित महामति श्री प्राणनाथ जी मंदिर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कथा का समापन होगा।
जन्माष्टमी के अवसर पर पन्ना धाम सहित देश-विदेश के श्री प्राणनाथ एवं श्री कृष्ण प्रणामी मंदिरों में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।