
मुंबई। सितंबर की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरी बनी हुई है। बुधवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 370 अंक फिसलकर 76,570.35 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,914.45 पर आ गया।
पश्चिम एशिया की स्थिति ने बढ़ाई बाजार की चिंता
बाजार में कमजोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड में भी हलचल देखने को मिली।
महंगा तेल भारत के लिए बड़ी चुनौती
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए अहम चिंता बन गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात खर्च बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बन सकता है।
ब्याज दरों को लेकर भी निवेशक सतर्क
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने बाजार की चिंता और बढ़ाई है। महंगे ईंधन से महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऊंची यील्ड की स्थिति में निवेशकों का रुझान जोखिम वाले बाजारों से कुछ हद तक कम हो सकता है।
कई सेक्टरों में बिकवाली
बुधवार के कारोबार में बाजार की कमजोरी व्यापक रही। बैंकिंग और ऑटो समेत कई प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली।
रुपये और विदेशी निवेश पर भी नजर
कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती के बीच रुपये की चाल भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। बुधवार को रुपया 94.97 प्रति डॉलर के आसपास रहा। रिजर्व बैंक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है।
फिलहाल भारतीय बाजार की दिशा घरेलू आंकड़ों के साथ-साथ पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक ब्याज दरों से प्रभावित होती दिखाई दे रही है। ऐसे माहौल में बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।