
नई दिल्ली। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), जो देशभर के 12.5 लाख से अधिक केमिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से छोटे खुदरा विक्रेताओं और केमिस्टों को हो रहे घाटे से बचाने हेतु तत्काल कदम उठाने का अनुरोध करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया है।
यह मांग की
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के अध्यक्ष जे एस शिंदे और सचिव राजीव सिंघल ने व्यवहारिक और छोटे व्यापारियों के हो रहे घाटे के बारे में ज्ञापन में यह मांग की :-
* जीएसटी दरों में कटौती (18% से 5%, 12% से 0%, 12% से 5%) से उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, किन्तु छोटे विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
* अन रजिस्टर्ड और कम्पोजिट डीलर द्वारा उच्च जीएसटी दरों पर खरीदा गया स्टॉक अब कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अपरिहार्य नुकसान हो रहा है, विशेषकर जब दवा पर मार्जिन NPPA द्वारा तय किया गया है।
* अधिकांश छोटे व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं या फिर कम्पोजिट डीलर हैं जो कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर सकते।
* एआईओसीडी ने सरकार से अनुरोध किया है कि तीन माह तक छोटे व्यापारियों के पास जो स्टॉक हैं उसकी बिक्री पुराने एमआरपी पर विक्रय की अनुमति दी जाए, यदि आवश्यक हो तो विशेष राहत पैकेज भी घोषित किया जाए, और इस परिवर्तन काल की अवधि में छोटे विक्रेताओं के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
एआईओसीडी ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल राहत नहीं दी गई तो अनेक छोटे केमिस्ट अपनी दुकानें बंद कर सकते हैं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित भी अवश्य होगी जो कि सरकार की जवाबदारी होगी। संगठन ने सरकार से इस ऐतिहासिक सुधार के दौरान नजर अंदाज किए गए खुदरा दवा व्यापार की रीढ़ को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।