
इस्लामाबाद टॉक फेल होने के बाद अब स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर घमासान मच गया है। अमेरिका ने होर्मूज की नाकाबंदी शुरू कर दी है। दो अमेरिकी युद्धपोत और 15 जेट अरब सागर में तैनात कर दिए हैं। मालूम होकि होर्मूज में ईरान ने माईंस लगा रखी हैं। ईरान ने कहा है कि वह यहां से गुजरने वाले जहाजों को सेफ पैसेज देगा और टोल लेगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मूज से गुजरने वाले हर जहाज की नाकाबंदी कर जांच होगी। ट्रंप ने कहा कि ईरान को टोल देने वाले जहाजों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। अमेरिकी सेंटर कमांड के अनुसार यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आवाजाही करेंगे। जो गैर ईरानी बंदरगाहों से जा रहे हैं उन पर रुकावट नहीं डाली जाएगी। होर्मूज की नाकाबंदी में अमेरिका का साथ ब्रिटेन और फ्रांस ने देने से इंकार कर दिया है। चीन और रूस ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की है।
तैनाती जारी
अमेरिका का युद्धपोत अब्राहम लिंकन तैनात है। पूरी तैयार लाल सागर, होर्मूज, अरब सागर तक तैनात हैं। होर्मूज के रास्ते दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। 28 फरवरी के पहले तक सभी कुछ सामान्य है। लेकिन इसके बाद 40 दिन तक जंग चली और परिस्थितियां बदल गईं। होर्मूज यदि पूरी तरह बंद हुआ तो पूरे विश्व में तेल का संकट हो सकता है। वहीं सउदी अरब ने यूएस को नाकाबंदी हटाने कहा है। नाकेबंदी से ऊर्जा संकट बढ़ेगा।
आइआरजीसी का पलटवार
ईरान के आइआरजीसी (रिवोल्यूशनरी) गार्ड ने पलटवार करते हुए कहा कि नाकाबंदी को समुद्री डकैती की तरह माना जाएगा और उसी के अनुरूप निपटा जाएगा। अमेरिकी युद्धपोतों के साथ ही खाड़ी देशों के बंदरगाह भी निशाने पर होंगे।
तय नहीं क्या जांच करेगा
अमेरिका जहाजों की क्या जांच करेगी यह स्पष्ट नहीं है। ऐसा कौन सा मेकेनिज्म है जिससे जांच की जाएगी। इस बारे में भी कोई स्पष्ट सूचना नहीं है।
नाटो शामिल नहीं
इस पूरे अभियान में नाटो के देशों ने हामी नहीं भरी है। ब्रिटेन और फ्रांस सुरक्षित तरीके से जहाजों की आवाजाही के पक्ष में है। इसके लिए वे बहुराष्ट्रीय पहल का नेतृत्व करने तैयार हैं।
Image: AI generated