
नई दिल्ली। मई 2026 में भारतीय फार्मास्युटिकल बाजार में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि का प्रमुख कारण कार्डियक, एंटी-डायबिटिक एवं एंटी-अस्थमा जैसी क्रॉनिक श्रेणी की दवाओं की मजबूत मांग रही। इसके अलावा कैल्शियम सप्लीमेंट्स एवं अन्य कुछ एक्यूट श्रेणी की दवाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
मई में सामान्य से अधिक रही मांग
आमतौर पर मई माह इन थेरेपी श्रेणियों के लिए उच्च वृद्धि वाला समय नहीं माना जाता, लेकिन इस बार मांग में वृद्धि देखने को मिली। इसके पीछे संभावित कारण यह माना जा रहा है कि मरीजों ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने या कीमतों में वृद्धि की आशंका के चलते अतिरिक्त स्टॉक खरीदना उचित समझा।
मौसमी दवाओं में धीमी वृद्धि
वहीं दूसरी ओर गैस्ट्रो, एंटी-इन्फेक्टिव्स, कफ एवं कोल्ड तथा दर्द निवारक (एनाल्जेसिक्स) जैसी मौसमी एक्यूट श्रेणी की दवाओं में वृद्धि दर अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। हालांकि देशभर में मानसून के सक्रिय होने के बाद इन श्रेणियों में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सेमाग्लूटाइड बाजार में स्थिरता के संकेत
सेमाग्लूटाइड जेनेरिक्स का बाजार अब स्थिरता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस श्रेणी में अब तक 31 कंपनियों ने प्रवेश कर लिया है। शुरुआती चरण में वितरकों और स्टॉकिस्ट स्तर पर मजबूत मांग देखने को मिली, जिससे बिक्री में तेजी आई। हालांकि अब बाजार वास्तविक मांग के अनुरूप संतुलित हो रहा है और वॉल्यूम वृद्धि की गति कुछ धीमी हुई है, जो स्थायी विकास का संकेत है।
बदलते उपभोक्ता व्यवहार का असर
कुल मिलाकर मई माह का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव आ रहा है और बाजार की गतिशीलता विभिन्न थेरेपी श्रेणियों में अलग-अलग रूप से विकसित हो रही है।