एसआईआर पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस आत्ममंथन करे: बृजेंद्र प्रताप सिंह

संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास जरूरी, जनादेश का सम्मान करना सभी दलों की जिम्मेदारी

पन्ना। पूर्व मंत्री एवं वर्तमान पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके निर्णय पर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को तथ्यों को देखना चाहिए।

सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि एसआईआर को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी तरह फॉर्म-6 और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत यह प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में संस्थाओं के प्रति अविश्वास का वातावरण बनाने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए।

हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं

बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है। जनता के मत से जो जनादेश मिलता है, उसका सभी राजनीतिक दलों को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर चुनाव आयोग, ईवीएम अथवा अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी कार्यप्रणाली पर भी विचार करना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि क्या पार्टी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को स्वीकार करती है? क्या चुनाव आयोग के निर्णय को संवैधानिक व्यवस्था के तहत मानती है? यदि देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर विश्वास है तो चुनाव परिणाम आने के बाद उन्हीं व्यवस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें भी इसी व्यवस्था से चलीं

विधायक ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक देश और प्रदेश में सत्ता में रही है। उस समय भी देश में यही संविधान, न्यायपालिका और चुनाव आयोग की व्यवस्था थी। उसी व्यवस्था के तहत सरकारें बनती रहीं और चुनाव होते रहे। इसलिए अब जब परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते हैं तो उन्हीं संस्थाओं पर सवाल खड़े करना उचित नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी के भीतर आत्ममंथन करना चाहिए। जिन राज्यों में पार्टी को लंबे समय से अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है, वहां जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए

बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संविधान के आधार पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था संचालित हो रही है।

उन्होंने कहा कि जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा करने के बजाय राजनीतिक दलों को सकारात्मक मुद्दों के साथ जनता के बीच जाना चाहिए। लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णय करती है और उसके जनादेश का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा