फाइलों में अटके छह फ्लाईओवर, ट्रैफिक जाम से परेशान जबलपुर की जनता

जबलपुर। शहर विकास की योजनाएं बनती हैं लेकिन धरातल पर कम ही उतरती हैं। ऐसा कुछ शहर में प्रस्तावित फ्लाईओवर के साथ हो रहा है। घोषणाओं के बाद ये परियोजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी हैं। इसी तरह ब्रिज निर्माण के कई प्रोजेक्ट वर्षों बाद भी फाइलों में अटके हुए हैं। कहीं भूमि अधिग्रहण अटका है तो कहीं डिजाइन में बदलाव, संशोधित डीपीआर, प्रशासनिक मंजूरी और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण काम धीमा पड़ा है।

शहर में सगड़ा फ्लाईओवर, बंदरिया तिराहा फ्लाईओवर, विजय नगर (ग्राउंड जीरो-संजीवनी नगर) फ्लाईओवर, खजरी-खिरिया बायपास फ्लाईओवर, लम्हेटा नर्मदा ब्रिज और सरस्वती घाट-गौरीघाट ब्रिज जैसी परियोजनाएं लंबे समय से चर्चा में हैं। इनमें कुछ का भूमिपूजन हो चुका है, कुछ की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और कुछ के लिए बजट भी जारी किया जा चुका है, लेकिन निर्माण की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी फ्लाईओवर का निर्माण 24 से 36 माह के भीतर पूरा किया जा सकता है। इसके विपरीत जबलपुर की कई परियोजनाएं चार से पांच वर्ष बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। इससे लागत में लगातार वृद्धि हो रही है और निर्माण अवधि भी बढ़ती जा रही है।

इन परियोजनाओं में देरी का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। बंदरिया तिराहा, विजय नगर, खजरी, सगड़ा और लम्हेटा जैसे क्षेत्रों में प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। पीक समय में यहां लंबा जाम लगता है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों खर्च हो रहे हैं। भारी वाहनों और स्थानीय यातायात के एक साथ चलने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।

शहरी विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि जबलपुर तेजी से विस्तार कर रहा है और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करना भी उतना ही जरूरी है। यदि लंबित फ्लाईओवर और ब्रिज परियोजनाएं तय समय में पूरी हो जाती हैं तो शहर के कई प्रमुख चौराहों और मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा तथा औद्योगिक, व्यावसायिक एवं पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

लंबित परियोजनाएं

सगड़ा फ्लाईओवर

रेलवे क्रॉसिंग पर जाम और बायपास के दुर्घटना संभावित स्थल से राहत के लिए यह फ्लाईओवर प्रस्तावित किया गया था। करीब तीन वर्ष पहले इसे स्वीकृति मिली और एक वर्ष पहले भूमिपूजन हुआ। निर्माण शुरू होने के बाद जिस हिस्से में फ्लाईओवर बनना है वहां कुछ जमीनों का अधिग्रहण बाकी है। भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्य धीमी गति से चल रहा है।

बंदरिया तिराहा फ्लाईओवर

साईं मंदिर आदर्श नगर से बंदरिया तिराहा, अनगढ़ महावीर मंदिर एवं हवाबाग कॉलेज तक प्रस्तावित इस फ्लाईओवर की अनुमानित लागत 362 करोड़ रुपये है। यह सीआरएफ से प्रस्तावित है। बजट में प्रस्ताव शामिल होने के बावजूद निर्माण कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हो सका है।

विजय नगर (ग्राउंड जीरो-संजीवनी नगर) फ्लाईओवर

इस परियोजना को पिछले बजट में स्वीकृति मिली थी। बाद में इसके डिजाइन में बदलाव किया गया। वर्तमान में इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। भोपाल स्तर पर अंतिम स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। लगभग 180 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कब शुरू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

खजरी-खिरिया बायपास फ्लाईओवर

खजरी-खिरिया बायपास चौराहे पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर बना रही है। करीब तीन वर्ष पहले स्वीकृत इस परियोजना का निर्माण डिजाइन संबंधी कारणों से लंबे समय से अधर में है।

लम्हेटा नर्मदा ब्रिज

लगभग 190 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला लम्हेटा ब्रिज बीते चार वर्षों से विभिन्न प्रक्रियाओं में अटका हुआ है। नर्मदा के उस पार लम्हेटी क्षेत्र में जहां पुल उतर रहा है, वहां सड़क का समुचित मिलान अभी तक नहीं हो पाया है। कई स्तरों पर कार्य शेष होने के कारण अगले वर्ष तक ही इस पर यातायात शुरू होने की संभावना है।

सरस्वती घाट-गौरीघाट ब्रिज

यह नदी पुल पहले 28 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित था, लेकिन समय के साथ लागत बढ़कर 54 करोड़ रुपये हो गई। भोपाल से अनुमति मिलने के बाद कार्य जारी है। करीब चार वर्षों से प्रक्रिया में होने के बावजूद पुल तैयार नहीं हो पाया है। इसके निर्माण से नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।

चुंगी नाका फ्लाईओवर

शिवनगर कृषि उपज मंडी से पाटन एवं कटंगी मार्ग के मध्य आईएसबीटी दीनदयाल चौक तक प्रस्तावित इस फ्लाईओवर की अनुमानित लागत 301 करोड़ रुपये है। यह भी सीआरएफ से प्रस्तावित है, लेकिन फिलहाल इसे बजट में शामिल नहीं किया गया है, जबकि इसकी घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

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