मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर रोक, निर्माण से बिक्री तक सरकार ने कसा शिकंजा

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने दूध से बने असली पनीर के नाम पर बाजार में बिक रहे ‘एनालॉग पनीर’ के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ऐसे पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है। मध्य प्रदेश ऐसा कदम उठाने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। इससे पहले छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात में भी एनालॉग या कृत्रिम पनीर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद ऐसी आशंका सामने आई थी कि इन उत्पादों को मध्य प्रदेश के बाजार में खपाया जा सकता है। इसी को देखते हुए राज्य में भी इसकी बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने का फैसला किया गया।

ये है एनालॉग पनीर

एनालॉग पनीर देखने में सामान्य पनीर जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसमें दूध की जगह या दूध के कुछ हिस्से की जगह वनस्पति वसा, तेल अथवा अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कम लागत में तैयार होने के कारण ऐसे उत्पादों की कीमत कम हो सकती है।

जांच में सामने आईं खामियां

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मध्य प्रदेश में पनीर के नमूनों की जांच की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 921 नमूनों में से 123 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 98 नमूनों में बीआर (Butyro-Refractometer) रीडिंग से संबंधित गड़बड़ी मिली, जबकि 25 नमूनों में वसा की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने आशंका जताई कि कुछ मामलों में मानक पनीर की जगह दूसरे प्रकार के डेयरी या गैर-डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

होटल और ढाबों पर भी नजर

सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग संस्थानों, ढाबों और स्ट्रीट फूड दुकानों को भी निगरानी के दायरे में रखा है। वजह यह है कि बाहर खाना खाने वाले ग्राहक अक्सर यह पता नहीं लगा पाते कि उन्हें परोसे जा रहे व्यंजन में इस्तेमाल किया गया पनीर वास्तविक है या किसी दूसरे उत्पाद से तैयार किया गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच और नमूने लेने की कार्रवाई की जा सकती है। इससे बाजार में इस्तेमाल किए जा रहे पनीर की गुणवत्ता और मानकों की निगरानी की जा सकेगी।

गैर मानक डेयरी प्रोडक्ट की बिक्री पर शिकंजा

मध्य प्रदेश सरकार ने अब इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए मिलावटी और गैर-मानक डेयरी उत्पादों की बिक्री पर शिकंजा कसने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा है कि सरकार का फोकस वास्तविक दूध उत्पादन को बढ़ावा देने पर रहेगा, न कि एनालॉग पनीर जैसे उत्पादों के कारोबार को प्रोत्साहित करने पर।

एनालॉग पनीर पर रोक के फैसले के बाद अब इसके निर्माण से लेकर बाजार में बिक्री तक की गतिविधियां खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी में रहेंगी। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में भी पनीर के इस्तेमाल को लेकर जांच की कार्रवाई की जा सकती है।

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