
जबलपुर। ईश्वर की कृपा से ही ईश्वरीय मार्ग की प्राप्ति संभव है। साधनों से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती है, अपितु ईश्वर की कृपा से ही साधन प्राप्त होते हैं। जो लोग गुरु चरणाश्रय, नामाश्रय या कथाश्रय के बिना ईश्वर की खोज में लगे हैं, उनके लिए ईश्वर की प्राप्ति रेगिस्तान में पानी को खोजने जैसा ही है। सत्संग, कथा श्रवण और नाम जप से हृदय विकार मुक्त होता है और प्रभु कृपा करने को बाध्य हो जाते हैं।
प्रभु नाम का आश्रय ही कृपा के द्वार की चाबी
संसार में अपनी बुद्धि, रूप, कुशलता, चातुर्यता, पद, धन किसी भी वस्तु पर अहम मत करना। ये सब तुम्हारी बुद्धि के कारण नहीं, अपितु भगवद् अनुग्रह के कारण ही तुम्हें प्राप्त हुई हैं। भगवान की कथा और नाम को कभी भी छूटने मत देना, क्योंकि प्रभु नाम ही इस मनुष्य जीवन की वास्तविक उपलब्धि भी है। निष्ठापूर्वक प्रभु नाम का आश्रय ही प्रभु कृपा के द्वार की चाबी है।
नंदोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग
भगवान श्रीकृष्ण ने बाल लीलाओं में हर बाल सखा, पेड़-पौधे, वृक्ष-लता कृष्ण-कृष्ण पुकारते हैं। भगवान सभी को तारते हैं। उक्त उद्गार भागवताचार्य स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज ने नंदोत्सव, भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के कथा प्रसंग में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के पंचम दिवस व्यास पीठ से कहे।
26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक भागवत कथा का आयोजन
भक्ति धाम गौरीघाट में पितृपक्ष में नर्मदा मैया के तट पर परम पूज्य भागवताचार्य स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज के श्रीमुख से 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक दोपहर 4 बजे से श्रीमद् भागवत महापुराण का व्यास पीठ से श्रवण करायेंगे।
श्रद्धालु भक्तों से उपस्थिति का आग्रह
भागवत सेवा समिति के विजय पंजवानी, दिलीप तलरेजा, गोविंद हिरानी, शमन आसवानी, नरेंद्र केसवानी, जयप्रकाश, प्रिया पंजवानी, जेठानंद खत्री, पप्पू लालवानी, गोपाल सावलानी, उमेश पारवानी, वेदान्त शर्मा, करिश्मा शर्मा, जया लालवानी, हितिशा शर्मा, विनू माखीजा, ममता कुकरेजा, घनश्याम निरंकारी, पुष्पराज पंडित, लालू महाराज, अभिषेक, रामजी पुजारी ने श्रद्धालु भक्तों से उपस्थिति का आग्रह किया है।