Ram Katha in Jabalpur: निर्गुण और सगुण रूप में व्याप्त हैं राम: मोरारी बापू

ओशो जयंती पर साइंस कॉलेज मैदान में चल रही राम कथा

जबलपुर। ओशो जयंती के अवसर पर साइंस कॉलेज मैदान, सिविल लाइन में चल रही राम कथा में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक मोरारी बापू ने गहन विचार व्यक्त किए। बापू ने कहा कि राम कथा का आदि सत्य है, मध्य प्रेम है और समापन करुणा है। इन तीन सूत्रों से जुड़ी कथा किसी भी धर्म, विचारधारा या साधना पद्धति के द्वारा नकारा नहीं जा सकती — यदि कोई इनकार करे तो वह आध्यात्मिकता के दायरे में कैसे ठहर सकता है।

सगुण और निर्गुण के स्वरूप पर विचार

मोरारी बापू ने बताया कि ओशो ने राम के दो रूपों — निर्गुण और सगुण — का उल्लेख किया है। सगुण रूप में राम दशरथ जी के पुत्र हैं जबकि निर्गुण रूप में वे समस्त जगत में व्याप्त हैं। सगुण और निर्गुण का बोध कराने वाला राम का नाम है। बापू ने यह स्पष्ट किया कि राम का सगुण-निर्गुण द्वैत एक ब्रह्मसिद्ध सत्य की ओर इंगित करता है और रामचरितमानस के आदि, मध्य तथा अंत में यही तत्व निहित हैं।

राम नाम एक सेतु है

प्रवचन में बापू ने राम नाम को एक सेतु बताया — जो निर्गुण से सगुण तक और सगुण से निर्गुण तक की यात्रा कराता है। उन्होंने रामसेतु की कथा का संदर्भ देते हुए कहा कि कैसे प्रत्येक पत्थर पर राम नाम अंकित होने से ही वह सेतु बना। बापू ने यह उदाहरण देकर समझाया कि बाहरी यंत्रणा से अधिक महत्व राम नाम के आत्मिक अंकन का है।

राम नाम के मर्म की व्याख्या

बापू ने कहा कि राम पर बहुत कुछ कहा और आलोचना भी हुई है, परन्तु आलोचना में उलझने के स्थान पर रामचरितमानस के मूल तत्व — सत्य, प्रेम और करुणा — को समझना चाहिए। उन्होंने भगवान बुद्ध के संदर्भ में भी बताया कि विभिन्न मार्गों का सम्मान करते हुए करुणा का मार्ग अधिक प्रिय है। बापू ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि करुणा और प्रेम से ही आध्यात्मिकता का सच्चा आधार बनता है।

आयोजन का संचालन और वक्ताओं की अपील

मोरारी बापू के उद्गार व्यासपीठ से व्यक्त किए गए। आयोजन समिति ने कथा प्रेमियों से अनुरोध किया है कि वे प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक कथा का रसास्वादन कर सकें। कथासत्र में श्रोताओं को सत्य, प्रेम और करुणा के माध्यम से आत्मिक अनुभूति प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

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