51 साल तक बिजली व्यवस्था का साथी रहा ट्रांसफार्मर, एमपी ट्रांसको ने दी भावभीनी विदाई

बेहतर रखरखाव से निर्धारित आयु से दोगुने समय तक की सेवा

जबलपुर। प्रदेश की बिजली व्यवस्था का करीब आधी सदी तक अभिन्न हिस्सा रहे 51 वर्ष पुराने पावर ट्रांसफार्मर को मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के कार्मिकों ने भावुक माहौल में विदाई दी। सीहोर जिले के इछावर स्थित 132 केवी सबस्टेशन में स्थापित 20 एमवीए क्षमता के इस ट्रांसफार्मर ने लगभग पांच दशक तक विद्युत व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्थान पर अब 50 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है।

वर्ष 1975 में भारत बिजली लिमिटेड द्वारा निर्मित यह ट्रांसफार्मर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति का साक्षी रहा। लंबे सेवाकाल के दौरान विभिन्न सबस्टेशनों में काम करते हुए इसने बदलती विद्युत जरूरतों और बढ़ते बिजली भार के बीच विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में योगदान दिया। इसके रिटायर होने का अवसर केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि उस मशीन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का क्षण बन गया, जिसने पांच दशक तक बिजली व्यवस्था का साथ दिया।

कार्मिकों के कौशल और समर्पण का भी रहा योगदान : ऊर्जा मंत्री

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ट्रांसफार्मर के लगभग पांच दशक लंबे सेवाकाल के पीछे मध्यप्रदेश विद्युत मंडल और बाद में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं मेंटेनेंस कार्मिकों की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने पुराने और नए सभी कार्मिकों को बधाई देते हुए कहा कि समय-समय पर रखरखाव, तकनीकी देखरेख और आवश्यक मेंटेनेंस के जरिए इसे लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखा गया।

उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और परिस्थितियों के बीच किसी पुराने उपकरण को इतने लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना कार्मिकों के अनुभव, तकनीकी दक्षता और समर्पण का प्रमाण है। यह ट्रांसफार्मर की पांच दशक की यात्रा के साथ-साथ विद्युत कर्मियों की मेहनत और कार्यकुशलता की कहानी भी है। यह उपलब्धि विद्युत क्षेत्र के अभियंताओं और तकनीकी कार्मिकों के दीर्घकालिक अनुभव तथा सतत रखरखाव प्रयासों को रेखांकित करती है।

बदलते दौर का साक्षी रहा पुराना ट्रांसफार्मर

एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य ने बताया कि वर्ष 1975 में जब यह ट्रांसफार्मर पहली बार मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के नेटवर्क में शामिल हुआ था, तब प्रदेश की बिजली जरूरतें आज की तुलना में काफी अलग थीं। इसके बाद पांच दशकों में आबादी बढ़ी, औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हुआ और कृषि एवं घरेलू क्षेत्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ी। इस पूरे दौर में ट्रांसफार्मर ने अपनी निर्धारित क्षमता के अनुरूप विद्युत पारेषण व्यवस्था में योगदान दिया।

प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के विभिन्न सबस्टेशनों में सेवा देने के बाद वर्ष 2016 में इसे इछावर के 132 केवी सबस्टेशन में स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया था। अब इसके स्थान पर अधिक क्षमता वाला 50 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर लगाया गया है।

विदाई के साथ जुड़ीं पांच दशकों की यादें

ट्रांसफार्मर की विदाई के अवसर पर एमपी ट्रांसको के कार्मिकों ने उसके लंबे सेवाकाल को याद किया। तकनीकी उपकरणों के बीच काम करने वाले अभियंताओं और कर्मचारियों के लिए यह केवल पुराने ट्रांसफार्मर को हटाकर नया उपकरण लगाने का अवसर नहीं था, बल्कि उस साथी को विदा करने जैसा था, जिसने उनके कार्यकाल के साथ-साथ कई पीढ़ियों के विद्युत सेवाकर्मियों का साथ दिया। करीब पांच दशक की सेवा के बाद इसकी विदाई एमपी ट्रांसको के कार्मिकों के लिए यादगार क्षण बन गई।

निर्धारित आयु 25 वर्ष, बेहतर रखरखाव से 51 वर्ष तक किया काम

विद्युत प्राधिकरण के निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्यतः पावर ट्रांसफार्मर की कार्यशील आयु 25 वर्ष मानी जाती है। हालांकि, मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं तकनीकी कार्मिकों द्वारा समय-समय पर किए गए प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, नियमित परीक्षण और उचित रखरखाव के परिणामस्वरूप यह ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित कार्यशील आयु से दोगुने से भी अधिक, लगभग 51 वर्षों तक विद्युत सेवा में कार्यरत रहा।

85,708 एमवीए हुई प्रदेश की ट्रांसफार्मेशन क्षमता

एमपी ट्रांसको प्रदेश में 418 अति उच्च दाब सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण कर रही है। इनमें 400 केवी के 14, 220 केवी के 88 और 132 केवी के 316 सबस्टेशन शामिल हैं। कंपनी के कुल 1,060 पावर ट्रांसफार्मरों की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता नए ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के बाद बढ़कर 85,708 एमवीए हो गई है।