
पन्ना। आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच विजयादशमी से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव शुक्रवार 30 अक्टूबर को परंपरागत धार्मिक आयोजनों के साथ संपन्न हो गया। दस दिवसीय इस महोत्सव का सबसे विशेष पक्ष शरद पूर्णिमा की पूनम की रात्रि से पंचमी तक चलने वाला रासमंडल का आयोजन रहा, जिसे प्रणामी धर्मावलंबी एक महारात्रि के रूप में देखते हैं। इस दौरान भजन, वाणी गायन, रासलीला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गरबा नृत्य के माध्यम से सुंदरसाथ ने भक्ति और साधना में सहभागिता की।

महारात्रि की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है रासमंडल का आयोजन
प्रणामी धर्मावलंबियों की मान्यता के अनुसार पूनम से पंचमी तक की अवधि सामान्य पांच रात्रियों का क्रम नहीं, बल्कि एक महारात्रि का स्वरूप है। धार्मिक विश्वास है कि इस अवधि में महामति श्री प्राणनाथ जी अपने अनंत स्वरूप में सुंदरसाथ के साथ ब्रज की दिव्य लीलाओं को कलियुग में पुनः साकार करते हैं। सुंदरसाथ अपने आराध्य श्रीजी को प्रियतम स्वरूप में अनुभव करते हुए इस दिव्य आयोजन में सहभागी बनता है। यही वजह है कि पूनम की चांदनी से पंचमी की सुबह तक रासमंडल में भक्ति, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक साधना का क्रम बना रहता है।

दही की मटकियां लेकर निकली सवारी, जयकारों से गूंजा नगर
महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार सुबह लगभग 9 बजे रासमंडल स्थित ब्रह्म चबूतरे पर झीलना कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद अक्षरातीत परब्रह्म विजयाभिनंद बुद्ध निष्कलंक अवतार महामति श्री प्राणनाथ जी की सेवा बंगला साहिब मंदिर के लिए रवाना हुई। श्रीजी की सवारी आगे बढ़ते ही सुंदरसाथ ने ‘रास के रमइया की जय’, ‘धाम के धनी की जय’ और ‘प्राणनाथ प्यारे की जय’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय कर दिया।
सवारी में महिला और पुरुष श्रद्धालु दही से भरी सजी हुई मटकियां लेकर नृत्य करते चल रहे थे। महिलाएं सिर पर मटकियां रखकर तो पुरुष श्रद्धालु भी मटकी लेकर भक्ति में झूमते नजर आए। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु श्रीजी की एक झलक पाने के लिए आतुर दिखाई दिए। सुंदरसाथ ने पुष्पमालाएं अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। सवारी के बंगला साहिब मंदिर पहुंचने और श्रीजी के वहां विराजमान होने के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

चौथ की रात मंचीय प्रस्तुतियों के बाद पूरी रात चला गरबा
महोत्सव की चौथ की रात्रि भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शाम लगभग 7:30 बजे रासमंडल के सामने मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें धामी समाज के विद्वान-विदुषियों, बच्चों, युवक-युवतियों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए विद्वानों ने अपने विचार रखे। साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक परंपराओं की झलक दिखाई गई।
मध्यरात्रि लगभग एक बजे के बाद गरबा नृत्य शुरू हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में सुंदरसाथ शामिल हुआ। ढोलक और मंजीरों की ताल पर महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बच्चे पूरी रात गरबा करते रहे। रासमंडल में सामूहिक नृत्य और भक्ति संगीत का यह दृश्य महोत्सव के सांस्कृतिक उल्लास को दर्शाता रहा।
रासमंडल में सामूहिक आरती, ट्रस्ट ने जताया आभार
शुक्रवार सुबह लगभग 9:30 बजे ब्रह्म चबूतरे पर श्रीजी की आरती की गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। झीलना, आरती और श्रीजी की सवारी के धार्मिक विधान के साथ दस दिवसीय आयोजन पूर्ण हुआ।
समापन के अवसर पर श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश भाई पटेल, उपाध्यक्ष दया कृष्णा दुबे, सचिव प्रेमकिशोर शर्मा, प्रबंधक आशीष शर्मा तथा ट्रस्टी प्रेम शर्मा, चिदानंद शर्मा, दीपराज शर्मा, नरेंद्र धामी, राजेश शर्मा और अनिल शर्मा ने महोत्सव के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका प्रशासन, पत्रकारों, व्यापार मंडल, समाजसेवियों और समस्त सुंदरसाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने भविष्य में भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा की।
रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा