रादुविवि के विभागों में गहराता शिक्षक संकट, 156 में से 130 पद अब भी खाली

बायोसाइंस में कभी 18 शिक्षक थे, अब दो प्रोफेसरों के भरोसे विभाग; 2027 में एक और सेवानिवृत्ति से बढ़ेगी चुनौती

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की कमी अब गंभीर शैक्षणिक चुनौती बनती जा रही है। लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं होने और लगातार सेवानिवृत्तियों के चलते कई विभागों में शिक्षकों की संख्या लगातार कम हुई है। बायोलॉजिकल साइंस विभाग की स्थिति इसका उदाहरण है, जहां कभी करीब 18 नियमित शिक्षक कार्यरत थे, लेकिन अब विभाग की जिम्मेदारी महज दो प्रोफेसरों के भरोसे है।

विश्वविद्यालय के बायोलॉजिकल साइंस विभाग में एक प्रोफेसर अप्रैल 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में नियमित शिक्षकों की संख्या और घट जाएगी।

1989 के बाद भर्ती का इंतजार

विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बायोसाइंस विभाग में नियमित शिक्षक की आखिरी नियुक्ति 1989 में हुई थी। इसके बाद नई नियमित नियुक्तियां नहीं होने से समय के साथ शिक्षकों के पद सेवानिवृत्ति के कारण खाली होते गए। इसका सीधा असर विभाग की शैक्षणिक क्षमता पर पड़ा।

1968 में स्थापित इस विभाग में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ शोध कार्य भी होता है। ऐसे में नियमित शिक्षकों की कमी को केवल कक्षाओं की समस्या नहीं माना जा सकता। शोध निर्देशन और विद्यार्थियों के अकादमिक मार्गदर्शन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

केमिस्ट्री और फिजिक्स भी संकट में

शिक्षकों की कमी बायोसाइंस तक सीमित नहीं है। केमिस्ट्री विभाग में भी लंबे समय से नियमित शिक्षकों के पद खाली हैं। फिजिक्स विभाग में भी शिक्षकों की संख्या काफी कम बताई जा रही है। यदि मौजूदा वरिष्ठ शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं तो इन विभागों में भी नियमित अध्यापन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, योग, फिलासफी, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र और बीएड जैसे विभाग भी पर्याप्त नियमित शिक्षकों की कमी से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर अतिथि शिक्षकों के सहारे शिक्षण व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है।

130 पद रिक्त, भर्ती से भी पूरी नहीं होगी कमी

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विश्वविद्यालय में कुल 156 स्वीकृत शिक्षक पद हैं। सितंबर 2026 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार इनमें 26 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 130 पद अभी भी खाली हैं। यानी स्वीकृत पदों का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा रिक्त है।

जून 2026 में सामने आए आंकड़ों में नियमित शिक्षकों की संख्या 18 और रिक्त पदों की संख्या 138 बताई गई थी। बाद में कुछ नियुक्तियों या कार्यभार ग्रहण के कारण स्थिति में आंशिक सुधार हुआ, लेकिन रिक्तियों का आंकड़ा अब भी काफी बड़ा है।

28 पदों के लिए निकला भर्ती विज्ञापन

विश्वविद्यालय ने मई 2026 में नियमित सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। 23 मई को जारी विज्ञापन में बायोसाइंस, केमिस्ट्री, फिजिक्स, हिंदी, अर्थशास्त्र, फिलासफी, राजनीति शास्त्र, संस्कृत और समाजशास्त्र सहित कई विषयों को शामिल किया गया था। कुल 28 पदों पर भर्ती प्रस्तावित की गई थी।

हालांकि, दशकों से चली आ रही शिक्षकों की कमी के मुकाबले यह भर्ती संख्या काफी कम है। ऐसे में विश्वविद्यालय के सामने नई भर्ती के साथ-साथ सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के पदों को समय पर भरने की चुनौती भी बनी हुई है।

शोध और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर

नियमित शिक्षक किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। वे अध्यापन के अलावा शोधार्थियों का मार्गदर्शन, शोध परियोजनाओं का संचालन और विभागीय अकादमिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक पद खाली रहने से इन गतिविधियों की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को नैक से ‘ए’ ग्रेड प्राप्त है। ऐसे में बड़ी संख्या में नियमित शिक्षक पद रिक्त होना विश्वविद्यालय के लिए गंभीर चुनौती है। अब जरूरत इस बात की है कि भर्ती प्रक्रिया को गति देने के साथ लंबे समय से खाली पदों को स्थायी रूप से भरा जाए, ताकि आने वाले वर्षों में सेवानिवृत्ति के कारण विभागों की स्थिति और कमजोर न हो।