शेयर बाजार में दिवाली जैसी रौनक, सेंसेक्स 2000 अंक से ज्यादा उछला

निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा, निफ्टी 24,500 के पार

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। घरेलू बाजार में चौतरफा खरीदारी के बीच बीएसई सेंसेक्स 2,000 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 24,500 का स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79,310.01 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 ने 576 अंक यानी 2.40 प्रतिशत की छलांग लगाकर 24,536.60 अंक पर कारोबार समाप्त किया। दोनों प्रमुख सूचकांकों के लिए यह पिछले कई महीनों के सबसे मजबूत कारोबारी सत्रों में से एक रहा।

तेजी के पीछे रहे कई बड़े कारण

शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव की अहम भूमिका रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत को लेकर निवेशकों की चिंताएं कम हुईं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर उम्मीदें बढ़ीं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान संघर्ष के समाधान की संभावनाओं ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में वापसी और लगातार खरीदारी ने तेजी को अतिरिक्त मजबूती दी। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर भी घरेलू कारोबार पर दिखाई दिया।

बैंकिंग और ऑटो शेयरों में जोरदार खरीदारी

गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी सकारात्मक रुख रहा। बाजार में व्यापक खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों को ऊंचाई हासिल करने में मदद मिली।

विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेश की वापसी और वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा दी है। हालांकि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कंपनियों के वित्तीय नतीजे और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी।