
जबलपुर। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों और अभियंताओं को सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विद्युत नेटवर्क में समावेश को लेकर तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। केएफडब्ल्यू जर्मनी के सहयोग से संचालित ‘सहायक उपाय परियोजना’ के अंतर्गत होटल सत्यम अशोका में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंताओं ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने पीएम कुसुम योजना के साथ-साथ सोलर थर्मल परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा की बिलिंग व्यवस्था और ग्रिड इंटीग्रेशन से जुड़े विभिन्न तकनीकी विषयों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में बताया गया कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं को वितरण प्रणाली से जोड़ते समय नेटवर्क की क्षमता, संचालन संबंधी आवश्यकताओं और तकनीकी मानकों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके साथ ही ऊर्जा के सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रवाह को सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
मैदानी स्तर की चुनौतियों पर हुआ विचार-विमर्श
प्रशिक्षण सत्र के दौरान अभियंताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन में सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को विशेषज्ञों के साथ साझा किया। बिलिंग, परियोजना संचालन और ग्रिड में उत्पादित बिजली के प्रभावी समावेशन से संबंधित प्रश्नों पर विशेषज्ञों ने समाधान और आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण में किया सहभागिता
कार्यक्रम का आयोजन मर्काडोस एनर्जी मार्केट्स इंडिया के प्रैक्टिस हेड एवं सीओओ रमनदीप सिंह, पार्टनर मोहित भारद्वाज और निदेशक सिद्धार्थ घोष के मार्गदर्शन में किया गया। कंपनी की ओर से सीनियर मैनेजर इमरान खान, प्रबंधक प्रशांत मिश्रा, सीनियर एनालिस्ट सिद्धार्थ शेखर स्वैन, प्रबंधक इशानी सिन्हा, रत्नेश वर्मा और सीनियर एनालिस्ट मोहम्मद शमशेर ने प्रशिक्षण में सहभागिता की।
नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी संचालन पर जोर
प्रशिक्षण का उद्देश्य अभियंताओं को नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं की बेहतर समझ प्रदान करना और पीएम कुसुम सहित अन्य सौर परियोजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक क्षमता विकसित करना रहा। इसके माध्यम से वितरण नेटवर्क में नवीकरणीय ऊर्जा के सुचारू एकीकरण को लेकर व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
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