मराठा पूजन पद्धति से विराजमान हुए गणपति बप्पा, क्षत्रिय मराठा समाज ने मनाया गणेश महोत्सव

छत्रपति शिवाजी महाराज उद्यान में जोशी गुरुजी के मार्गदर्शन में हुआ गणपति स्थापना पूजन

जबलपुर। गजानन महाराज के आगमन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ क्षत्रिय मराठा समाज जबलपुर द्वारा गणपति बप्पा की स्थापना की गई। श्रीगणेश चतुर्थी के अवसर पर विजयनगर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज उद्यान में गणपति बप्पा विराजमान हुए। इस अवसर पर श्रीगणेश चतुर्थी पर गजानन महाराज के आवाहन एवं स्थापना का पूजन मराठा समाज के रीति-रिवाज और पूजन पद्धति के अनुसार संपन्न हुआ।

मराठा समाज की पूजन पद्धति से हुआ गणपति स्थापना समारोह

गणपति स्थापना का पूजन श्री जोशी गुरुजी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मराठा समाज के सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार गजानन महाराज का आवाहन कर विधि-विधान से पूजन किया और गणपति बप्पा को विराजमान कराया। श्रीगणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित इस स्थापना कार्यक्रम में समाज के सामाजिक जन उपस्थित रहे।

गणेश उत्सव में प्रतिदिन सहभागी होने का लिया संकल्प

गणपति स्थापना के अवसर पर पार्षद प्रतिभा भापकर ने कहा कि सभी को संकल्प लेना चाहिए कि इस बार 12 दिवसीय गणेश उत्सव में प्रतिदिन गणेश पंडाल में उपस्थित होकर उत्साह और आनंद के साथ सहभागी होंगे। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव के माध्यम से सनातन संस्कृति से युवाओं और बच्चों को जोड़कर रखने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने गणेश उत्सव में समाज की सहभागिता और युवाओं एवं बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान गणपति बप्पा की स्थापना के अवसर पर समाज के लोगों ने आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

क्षत्रिय मराठा समाज के सामाजिक जन रहे उपस्थित

गणपति स्थापना कार्यक्रम में क्षत्रिय मराठा समाज जबलपुर के सुनील दत्त सोनोने, सुशील कुमार जाधव, संतोष सोनोने, मधुसूदन वाघ, विजय डुचे, प्रवीण सालुंके, तरुण सोनोने, अनिरुद्ध जाधव, उमेश सरफरे, अजय सोनोने, विवेक भोंसले, आनंद राजा और विध्येश भापकर उपस्थित रहे।

इसके अलावा प्रतिभा जाधव, रंजना सोनोने, माया सहित अन्य सामाजिक जन भी गणपति स्थापना के अवसर पर मौजूद रहे। समाजजनों ने गणपति बप्पा के पूजन में सहभागिता की और गणेश उत्सव के आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

क्षत्रिय मराठा समाज जबलपुर द्वारा आयोजित गणपति स्थापना के साथ ही 12 दिवसीय गणेश उत्सव की गतिविधियों में समाज की सहभागिता का क्रम शुरू हुआ। आयोजन के माध्यम से युवाओं और बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

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