
जबलपुर। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत कालजयी अनिल कुमार श्रीवास्तव फाउंडेशन व सुर पराग आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन द्वारा ‘भाषा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रानी दुर्गावती संग्रहालय स्थित कला वीथिका में आयोजित ‘भाषा’ की शुरुआत में सेवानिवृत्त आचार्य डॉ. प्रियव्रत शुक्ला ने व्याख्यान दिया। जहां डॉ. शुक्ला ने अनुभूति, भाषा और संप्रेषणीयता पर अपनी बात रखी।
तबले और कविताओं की जुगलबंदी ने मोहा मन
कार्यक्रम में आगे बढ़ते हुए कविता ताल चरण में तबले और कविताओं की जुगलबंदी ने सभी का मनमोह लिया। इसमें तबला वादक लोकेश मालवीय के साथ युवा कवयित्री अलंकृति श्रीवास्तव ने हिंदी कविताओं और ब्रज भाषा के छंदों पर जुगलबंदी की प्रस्तुति दी।
काव्य पाठ ने छुआ हर दिल
इसके बाद काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें इंदौर से आए कवि आशुतोष दुबे, दुमका झारखंड से आए कवि विनय सौरभ और रायपुर से आए कवि वसु गंधर्व ने काव्य पाठ किया। काव्य संध्या में ‘किसी तरह लौट आओ मन…’, ‘गरीब रिश्तेदारों के हाल-चाल हम तक पहुंच नहीं पाते…’, ‘वे बहरूपिया थे, तरह-तरह का भेष धरने वाले…’, ‘जो जा रहा है उसे जाने दो, रुक जाना, रह जाना नहीं है, उसे जाने दो…’ जैसी कविताओं के पाठ ने हर दिल को छू लिया।
कविताओं की संगीतमयी प्रस्तुति
आयोजन की अगली कड़ी में सुर पराग आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन द्वारा कविताओं की संगीतमयी प्रस्तुति दी गई। इसमें गायन तापसी नागराज व श्रेया देसाई ने किया। बांसुरी वादन मुरलीधर नागराज ने किया। गिटार पर आरोही मिश्रा और हारमोनियम पर राज्यवर्धन पटेल ने संगत दी।
विवेक चतुर्वेदी ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन कवि विवेक चतुर्वेदी ने किया। आभार आदित्य श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।