
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान आपसी सहयोग, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है।
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत
ब्रिक्स देशों ने वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और सुधार की मांग करता रहा है। सम्मेलन में सुरक्षा परिषद में भारत जैसे देशों की भूमिका बढ़ाने के पक्ष में समर्थन का संकेत मिला।
व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा
घोषणा-पत्र में सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों, व्यापारिक रुकावटों और टैरिफ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद को प्रभावी माध्यम बनाने की बात कही गई। वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी बनाने पर भी जोर रहा।
ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने को भी प्राथमिकता दी गई। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात में सीमा पर शांति पर जोर
शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को भारत-चीन संबंधों के लिए अहम बताया गया। दोनों पक्षों ने मतभेदों को विवाद में बदलने से बचने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया।
वैश्विक शांति और सुरक्षा पर ब्रिक्स का फोकस
सम्मेलन में ब्रिक्स को आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाने वाला मंच बनाने का संदेश भी सामने आया।