
नई दिल्ली। सीजेपी के प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह से बातचीत कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के वीपी हाउस में हुई। सीजेपी ने 3 मांगों का ज्ञापन सौंपा। जिसमें दो मांगों को सरकार प्रिंसिपल रूप से मान रही है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार से कोई पॉजिटिव जवाब नहीं मिला है। वहीं बातचीत के बाद सीजेपी के प्रतिनिधियों ने छात्रों से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं, उनका इस्तीफा लिया जाए या मंत्रिमंडल से धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त किया जाए। रविवार को एक बार फिर बातचीत होगी।
ये चर्चा हुई
सीजेपी के दो प्रतिनिधि और सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह के बीच बातचीत में तीन मांगें रखी गई थीं। इन मांगों में सबसे पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। वे इस्तीफा दें या उनको मंत्रिमंडल से बर्खास्त करे सरकार। दूसरी मांग एक करोड़ का मुआवजा देने की है।
यह मुआवजा उन बच्चों के परिजनों को दिया जाए, जिनके बच्चों ने नीट एग्जाम में पेपर लीक होने के कारण आत्महत्या कर ली। तीसरी मांग अनशन करने वाले छात्रों पर एफआईआर वापस हो। सरकार गारंटी दे कि भविष्य में किसी को टारगेट नहीं किया जाएगा।
हालांकि चौथी मांग भी है, लेकिन वह पहली तीन मांगों के बाद उस पर चर्चा करने की है। वह मांग यह है कि सीजेपी ने फाइव पॉइंट चार्टर बनाया, जिसे सरकार कंसीडर करे। लेकिन इस पर चर्चा तब होगी, जब तीन डिमांड पर सरकार एग्री हो जाएगी। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने छात्रों को बताया कि विस्तृत चर्चा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर हुई।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल है। उनके इस्तीफे के बिना आंदोलन बंद नहीं होगा। शिक्षा सुधार को लेकर भले ही अलग-अलग डिमांड हों, लेकिन एक डिमांड धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कॉमन है। रविवार को फिर बातचीत होगी। यदि इस्तीफा नहीं होता तो एक और देशव्यापी कॉल दिया जाएगा। हालांकि सरकार इन प्रिंसिपल दो डिमांड मान रही है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक रुख नहीं है।
सीजेपी से बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधियों से अच्छे माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने 3 मांगें रखी हैं। उनसे बातचीत जारी रहेगी।