कंक्रीट निर्माण में गुणवत्ता जरूरी, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर

आईसीआई के 45वें स्थापना दिवस पर विशेषज्ञों ने सेल्फ-कॉम्पैक्टिंग, हाई-परफॉर्मेंस और 3-डी प्रिंटिंग तकनीक पर चर्चा की

जबलपुर। इंडियन कंक्रीट इंस्टीट्यूट (आईसीआई) के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीआई जबलपुर सेंटर की ओर से तकनीकी सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निर्माण कार्यों में कंक्रीट की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीकों और बदलती निर्माण जरूरतों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

सेमिनार में विशेषज्ञों ने सिविल निर्माण में मजबूत और टिकाऊ संरचनाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कंक्रीट के चयन तथा आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया।

तकनीकी सेमिनार में विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

सेमिनार के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर इंजी. प्रभात श्रीवास्तव रहे, जबकि अध्यक्षता जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक ने की। डॉ. चांडक ने आईसीआई जबलपुर सेंटर द्वारा तकनीकी क्षेत्र में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और इंजीनियरों को नई तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीकी क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों की जानकारी विद्यार्थियों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों तक पहुंचाना जरूरी है।

निर्माण में कंक्रीट की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने पर जोर

मुख्य अतिथि इंजी. प्रभात श्रीवास्तव ने निर्माण कार्यों में कंक्रीट की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सिविल स्ट्रक्चर की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊपन के लिए कंक्रीट का चयन और उपयोग निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया जाना जरूरी है।

उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन करने और परियोजना की आवश्यकताओं के अनुरूप कंक्रीट के इस्तेमाल पर जोर दिया।

आईसीआई की स्थापना और गतिविधियों की दी जानकारी

कार्यक्रम की शुरुआत आईसीआई जबलपुर सेंटर के अध्यक्ष डॉ. मनीष दुबे के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने संस्था की स्थापना और अब तक की तकनीकी गतिविधियों की जानकारी दी।

संस्था के सचिव डॉ. संजय वर्मा ने आईसीआई के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1982 में स्थापित संस्था के देशभर में 51 सेंटर संचालित हैं। इसके मार्गदर्शन में 400 से अधिक स्टूडेंट चैप्टर भी विभिन्न स्तरों पर सक्रिय हैं।

तकनीकी सत्र में आधुनिक कंक्रीट तकनीक पर चर्चा

सेमिनार के तकनीकी सत्र में प्रोफेसर वेदांत श्रीवास्तव ने कंक्रीट तकनीक के विकास और वर्तमान दौर में हो रहे प्रयोगों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने सेल्फ-कॉम्पैक्टिंग कंक्रीट, हाई-परफॉर्मेंस कंक्रीट, जियो-पॉलिमर कंक्रीट, फेरो-कंक्रीट और कंक्रीट निर्माण में 3-डी प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आधुनिक निर्माण परियोजनाओं में तकनीकी जरूरतों के अनुसार कंक्रीट का चयन महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों के इस्तेमाल से निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता, मजबूती और टिकाऊपन से जुड़े पहलुओं को बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सकता है।

भविष्य के इंजीनियरों के लिए नई तकनीकों की जानकारी जरूरी

प्रोफेसर वेदांत श्रीवास्तव ने कहा कि अलग-अलग निर्माण परियोजनाओं की जरूरत के अनुसार कंक्रीट का चयन करना महत्वपूर्ण है। भविष्य के इंजीनियरों को नई तकनीकों के साथ-साथ प्रोजेक्ट की प्रकृति, मजबूती, टिकाऊपन और गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने होंगे।

उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र में तकनीकी बदलावों के साथ इंजीनियरों के लिए नई तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी रखना आवश्यक है।

वरिष्ठ इंजीनियर और आईसीआई सदस्य रहे मौजूद

कार्यक्रम में आईसीआई जबलपुर सेंटर के कार्यकारिणी सदस्य नीरज ब्यौत्रा, संजीव जैन, विनय चौरसिया, इंजी. प्रभात श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ इंजीनियर आरके श्रीवास्तव, अनिल दुबे, प्रदीप जायसवाल, राहुल विश्वकर्मा, संजय सेन, प्रशांत साहू, अभिषेक परोहा, अमित नेमा, दिग्विजय सिंह, प्रतीक पटेल और राहुल ठाकुर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

तकनीकी सेमिनार के माध्यम से निर्माण क्षेत्र से जुड़े इंजीनियरों और विद्यार्थियों को आधुनिक कंक्रीट तकनीकों की जानकारी देने के साथ गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ निर्माण की आवश्यकता का संदेश दिया गया।

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