अब कचरा पैदा करने वाले को ही बताना होगा, उसका निपटान कैसे होगा

जबलपुर: शहर में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने के लिए अब केवल नगर निगम के भरोसे रहने के बजाय कचरा उत्पन्न करने वाले की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट और बल्क वेस्ट जनरेटर अपने स्तर पर कचरे के पृथक्करण और निपटान की व्यवस्था करेंगे। खास तौर पर 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों से निकलने वाले अपशिष्ट के प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित परियोजना की होगी।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर आयोजित मीडिया संवाद में अधिकारियों ने बताया कि कचरा प्रबंधन की शुरुआत घर और संस्थान से ही होनी चाहिए। गीले, सूखे और अन्य प्रकार के कचरे को अलग-अलग रखने से उसके प्रसंस्करण और पुन: उपयोग की प्रक्रिया आसान होती है।

900 टन कचरे की रोजाना प्रोसेसिंग

जबलपुर में कचरे के निपटान के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की व्यवस्था है। यहां प्रतिदिन करीब 900 टन कचरे के निपटान की क्षमता बताई गई है। नगर निगम के अनुसार चार ट्रांसफर स्टेशनों से कचरा कठौंदा स्थित प्लांट तक पहुंचाया जाता है।

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने बताया कि कचरे से बिजली बनाने की व्यवस्था के जरिए नगर निगम को आर्थिक लाभ भी हुआ है। उनके अनुसार बिजली की बिक्री से करीब 50 करोड़ रुपये की आय हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि प्लांट के बंद रहने के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया था, जिसका बाद में निपटान कराया गया।

घर से अलग करना होगा कचरा

शहर की कचरा संग्रहण व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। नवंबर तक करीब 550 वाहनों के संचालन की योजना है। इन वाहनों के जरिए अलग-अलग श्रेणियों में कचरा एकत्र किया जाएगा। इसके लिए नागरिकों को घर से ही कचरे का पृथक्करण करना होगा।

पीआईबी के निदेशक मनीष गौतम ने कहा कि कचरे को अलग करने की प्रक्रिया उसके पैदा होने के स्थान से शुरू होनी चाहिए। उन्होंने ई-वेस्ट को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई। मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कचरे में डालने के बजाय अलग रखकर अधिकृत माध्यम से उसका निपटान कराया जाना चाहिए।

निर्माण मलबे को लेकर भी सख्ती

नई व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा बड़े निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे और अन्य अपशिष्ट का प्रबंधन है। 20 हजार वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं को अपनी कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों से निकलने वाले अपशिष्ट को सीधे नगर निगम की नियमित कचरा व्यवस्था में पहुंचने से रोकना है।

नगर निगम के अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि शहर में बड़ी मात्रा में कचरा प्रतिदिन उत्पन्न होता है। ऐसे में केवल सरकारी तंत्र के भरोसे प्रभावी कचरा प्रबंधन संभव नहीं है। नागरिकों और कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों की भागीदारी भी जरूरी है।

महापौर ने कहा कि स्वच्छता को सरकारी जिम्मेदारी तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी का विषय बनाना होगा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए स्वच्छ और स्वस्थ शहरों का निर्माण जरूरी है।