
शहपुरा। ग्राम फुलर (भीटा) में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के विश्राम दिवस पर कथा व्यास श्रीमद् जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
प्रेम और निःस्वार्थ मित्रता का अनुपम उदाहरण
महाराजश्री ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए प्रेम, त्याग और निःस्वार्थ संबंधों का अनुपम उदाहरण है। सुदामा अत्यंत निर्धन होने के बावजूद अपने मित्र श्रीकृष्ण से कभी कुछ मांगने नहीं गए। पत्नी के आग्रह पर वे भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे और प्रेमपूर्वक अपने साथ लाई हुई थोड़ी-सी पोहे की पोटली भगवान को अर्पित की।
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं किया सुदामा का स्वागत
सुदामा को देखकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सिंहासन से उठकर दौड़े और अपने बालसखा का प्रेमपूर्वक स्वागत किया। भगवान ने सुदामा के चरण धोकर यह संदेश दिया कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता। सुदामा ने भगवान से कुछ नहीं मांगा, लेकिन भगवान ने उनकी परिस्थिति को समझकर बिना मांगे ही उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर दिया।
सुदामा चरित्र सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग भक्ति और प्रेम से भर गया तथा श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सच्ची श्रद्धा और समर्पण से मिलती है भगवान की कृपा
महाराजश्री ने कहा कि भगवान भक्त के मन के भाव को देखते हैं, उसके पास कितना धन है यह नहीं। मन में सच्ची श्रद्धा, प्रेम और समर्पण हो तो भगवान अपने भक्त पर सदैव कृपा करते हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया कथा का श्रवण
कथा के विश्राम दिवस पर सुरेंद्र सिंह, राम सिंह, दशरथ सिंह, सुभाष सिंह, मनोज सिंह, वीरेंद्र सिंह, शैलेन्द्र सिंह, अनिरुद्ध सिंह, सत्यनारायण सिंह, हिम्मत सिंह, रामकिशोर सिंह, कल्याण सिंह, ओमकार सिंह, घनश्याम सिंह, उपेंद्र सिंह, गुरुवेंद्र सिंह, मयंक सिंह एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।