दिल्ली में INDIA गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन, मतदाता अधिकारों के मुद्दे पर विपक्ष ने दिखाई एकजुटता

SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों पर विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली। चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर विपक्षी दलों ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित इस महारैली में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। रैली के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित वोट चोरी और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे रहे।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंकाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका कहना था कि मतदान का अधिकार केवल चुनाव में भागीदारी का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज भी है। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

कई राज्यों के नेताओं ने एक मंच से उठाई आवाज

इस राजनीतिक आयोजन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राजद नेता तेजस्वी यादव सहित गठबंधन के अनेक प्रमुख चेहरे शामिल हुए।

रैली में नेताओं ने अपने-अपने राज्यों से जुड़े चुनावी अनुभवों और मतदाता सूची संबंधी शिकायतों का उल्लेख किया। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों की साझा मौजूदगी के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि चुनावी पारदर्शिता का प्रश्न विपक्ष के लिए एक साझा राजनीतिक मुद्दा है।

राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर आपत्ति जताते हुए उनके इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठ रही चिंताओं का उचित समाधान नहीं किया जा रहा है। रैली में इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के प्रति विपक्ष का विरोध भी स्पष्ट रूप से सामने आया।

खरगे और अखिलेश यादव ने भी रखे विचार

मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। वहीं अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में नामों से जुड़ी शिकायतों और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी। अन्य नेताओं ने भी चुनाव आयोग से शिकायतों का पारदर्शी तरीके से निराकरण करने की मांग की।

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि का सीधा असर नागरिकों की चुनावी भागीदारी पर पड़ सकता है। इसलिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी और जवाबदेही जरूरी है।

महारैली से पहले भी जारी रही थी राजनीतिक गतिविधियां

रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम से एक दिन पहले 31 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों और नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग से जुड़े प्रतीकात्मक कार्यक्रम के जरिए विरोध जताया था। विपक्ष ने उनके विरुद्ध कई आरोप सामने रखे और उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाए। इसके अगले दिन आयोजित महारैली को इसी अभियान के व्यापक राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा गया।

भाजपा ने भी विपक्ष पर किया राजनीतिक पलटवार

विपक्ष की महारैली के बीच भाजपा नेताओं ने भी अपने कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर निशाना साधा। दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की स्मृति से जुड़े कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित भाजपा नेताओं की भागीदारी रही। इस दौरान कांग्रेस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ आयोजन

रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे। मैदान और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी और अन्य निगरानी व्यवस्थाओं के साथ यातायात को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की गई।

आगे भी जारी रह सकता है चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा

रामलीला मैदान की महारैली के साथ INDIA गठबंधन ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता उसके साझा राजनीतिक एजेंडे में शामिल हैं। रैली समाप्त होने के बाद अब इस मुद्दे पर विपक्ष की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी। आने वाले समय में संसद और अन्य राजनीतिक मंचों पर भी इन सवालों को उठाए जाने की संभावना है।