Congress District President MP: बड़े नेताओं ने जिसके ‘सिर’ पर रखा हाथ, वही बना ‘सरताज’

कांग्रेस के संगठन सृजन में बड़े नेताओं ने अपनों का भविष्‍य संवारा

राजीव उपाध्‍याय

जबलपुर। संगठन सृजन अभियान कांग्रेस का ऐसा अभियान है जिसकी नींव संगठन को मजबूत करने के लिए रखी गई, लेकिन एआइसीसी ने मप्र के 71 डिस्ट्रिक प्रेसिडेंट की लिस्‍ट जारी करके यह दिखा दिया कि आज भी गुटबाजी बरकरार है। बड़े नेताओं ने जिनके ‘सिर’ पर अपना हाथ रखा वही ‘सरताज’ बन गया है। राहुल गांधी ने जिस सोच के अनुसार संगठन के सृजन की बात कही थी, इस हिसाब से तो खुद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी यह नजर नहीं आ रही है। लिस्‍ट की घोषणा के बाद कांग्रेस के अंदर दबी जुबान में गुटबाजी की चर्चा हो रही है।

ये है कमी

संगठन सृजन अभियान के तहत जब पूरे मध्‍यप्रदेश में एआइसीसी के पर्यवेक्षक डिस्ट्रिक प्रेसिडेंट के चयन के लिए हर जिले में गए थे तब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह लग रहा था कि अब निष्‍पक्ष रूप से चयन होगा। वे जो अपना बायोडाटा दे रहे हैं उस पर विचार होगा। उनके द्वारा कांग्रेस के लिए बरसों से दिए गए योगदान का आकलन होगा। यह विचार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में था। ऐसे कई कार्यकर्ता हैं जो बरसों से कांग्रेस से जुड़े हैं लेकिन उनको विधायक तो दूर की बात है पार्षद की टिकट भी नहीं मिली।

वे वरिष्‍ठता के नाते अपने को शहर या ग्रामीण अध्‍यक्ष पद के लिए योग्‍य समझ रहे थे लेकिन उनकी योग्‍यता पर सवालिया निशान किसी ने नहीं लगाया फर्क सिर्फ इतना रह गया कि उन पर बड़े नेताओं ने अपना हाथ नहीं रखा। जो पूर्व विधायक रह चुके हैं उनको विधायकी का मौका मिल चुका था। इससे अन्‍य कार्यकर्ताओं की मंशा थी कि जिनको मौका नहीं मिला है उनको शहर या ग्रामीण अध्‍यक्ष पद की कमान सौंपी जाए। जिससे संगठन में उनको भी किसी पद पर काम करने का मौका मिल सके।

ये है स्थिति

दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, अरूण यादव, अजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंगार, कांतिलाल भूरिया के समर्थकों को वरीयता मिली। दिग्‍विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह और भतीजा प्रियव्रत सिंह को अध्‍यक्ष बनाया गया।

इसलिए अध्‍यक्ष बनने की चाह

पूर्व विधायकों को भी शहर या ग्रामीण अध्‍यक्ष बनने की चाह इसलिए है क्‍योंकि यह पद अब केवल दिखावटी पद नहीं रहेगा। इस पद पर जो आसीन होगा उसे असीम शक्तियां मिलेंगी। चुनाव के वक्‍त उम्‍मीदवारों के नाम का चयन अध्‍यक्षों के द्वारा ही होगा। कोई भी कांग्रेस पदाधिकारी किसी भी बड़े पद पर क्‍यों न हो वह अध्‍यक्ष को बायपास नहीं कर सकेगा। राहुल गांधी ने साफ कहा है कि ऐसा जो करेगा उसकी जगह कांग्रेस में नहीं होगी। इस तरह की शक्तियां मिलने से पूर्व विधायक भी इस दौड़ में शामिल हुए।

यह अच्‍छी पहल

कांग्रेस में चार महिलाओं का चयन अध्‍यक्ष पद के लिए किया गया। यह पहली बार हुआ है कि मेन स्‍ट्रीम में अध्‍यक्ष पद के लिए महिलाओं का चयन कांग्रेस में हुआ है। इसके पहले महिलाओं को केवल महिला कांग्रेस में ही अध्‍यक्ष बनाया जाता था। इससे नई राह खुली है। हालांकि महिला कार्यकर्ताओं में अंदरूनी तौर पर यह चर्चा है कि यह संख्‍या कम है। इससे अधिक महिलाओं को अध्‍यक्ष बनाया जानना चाहिए था।

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