भक्ति रस में सराबोर हुआ मंदिरों का शहर पन्ना, तेरस की सवारी में उमड़ा जनसैलाब

प्राचीन खेजड़ा मंदिर से निकली श्री जी की दिव्य सवारी

पन्ना। प्रणामी धर्मावलंबियों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र माने जाने वाले मंदिरों के शहर पन्ना की छटा शनिवार की शाम से देर रात तक देखते ही बन रही थी। भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं की टोलियां जब प्राचीन खेजड़ा मंदिर से श्री जी की भव्य सवारी के साथ निकलीं तो पूरा नगर भक्ति रस में सराबोर हो गया। दशहरे के तीसरे दिन निकाली जाने वाली यह ऐतिहासिक शोभायात्रा सद्गुरू के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के धार्मिक आयोजनों में इस सवारी का विशेष महत्व होता है। दूर-दराज़ और विदेशों से आए सुंदर साथ (श्रद्धालु) भी इस अनूठे आयोजन में सम्मिलित हुए।

शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गुरुवार को खेजड़ा मंदिर से निकली इस ऐतिहासिक सवारी में श्री जी की मनमोहक झांकी मुख्य आकर्षण रही। श्रद्धालु श्री जी के दिव्य दर्शन के लिए उत्सुक नजर आए। इस वर्ष अन्य राज्यों के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में सुंदर साथ शामिल हुए। नगरवासियों ने जगह-जगह सवारी का भव्य स्वागत और आरती कर श्रद्धा भाव प्रकट किया।

दिव्य रथ पर सवार श्री जी की झलक पाने को आतुर रहे श्रद्धालु

शाम पांच बजे जैसे ही अखंड मुक्तिदाता महामति प्राणनाथ जी की सवारी प्राचीन खेजड़ा मंदिर से निकली, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो संत-मनीषी विविध रूप धारण कर इस सवारी की शोभा बढ़ा रहे हों। दिव्य रथ पर विराजमान श्री जी और धर्मगुरु की झलक पाने के लिए श्रद्धालु सड़कों के किनारे घंटों इंतजार करते रहे। नगरवासियों ने तहेदिल से स्वागत करते हुए जगह-जगह आरती उतारी और पुष्प वर्षा की।

सद्गुरू के सम्मान की प्रतीक है ‘तेरस की सवारी’

पन्ना में अंतर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के दौरान सैकड़ों वर्षों से निरंतर भव्य स्वरूप में श्री जी की सवारी निकाली जाती है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल जी ने की थी। जब बुंदेलखंड पर औरंगज़ेब के सरदारों ने आक्रमण किया, तब महामति प्राणनाथ जी ने महाराजा को अपनी चमत्कारी दिव्य तलवार देकर विजयश्री का आशीर्वाद दिया। युद्ध में विजय प्राप्त कर लौटने पर महाराजा ने सद्गुरू को पालकी में बिठाकर खेजड़ा मंदिर स्थित ब्रह्म चबूतरे तक लाए थे। उसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में यह सवारी हर वर्ष तेरस के दिन निकाली जाती है।

तीन किलोमीटर की यात्रा में सात से आठ घंटे

श्री खेजड़ा जी मंदिर से श्री प्राणनाथ जी मंदिर तक लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस दिव्य यात्रा में सात से आठ घंटे का समय लगा। सवारी में नगरवासियों ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ भागीदारी निभाई। श्रद्धालुओं ने श्री जी की झलक पाने के लिए सड़कों के किनारे खड़े होकर आरती उतारी और फूलों की वर्षा से स्वागत किया। शोभायात्रा में सम्मिलित सुंदर साथ को जगह-जगह प्रसाद और मिठाइयां भी वितरित की गईं।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा

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