मध्‍य प्रदेश में गधों की कमी: 9 जिलों में एक भी नहीं, जबलपुर में 4, यहां जानें अपने जिले कितने गधे

जबलपुर। प्रदेश में गधों की कमी हो रही है। प्रदेश के 9 जिलों में एक भी गधा नहीं है वहीं जबलपुर में केवल 4 गधे हैं। सबसे अधिक गधे नर्मदापुरम में 335 गधे हैं। मध्‍यप्रदेश में हुई पशु गणना के जारी आंकड़ो से यह जानकारी सामने आई। पशु गणना में गधा के साथ ही गौवंशीय, भैंसवंशीय, भेड़, घोड़ा, बकरी, टट्टू खच्‍चर, ऊंट, सूअर की गणना की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 3 करोड़ 75 लाख 92 हजार 771 पशु हैं।

चिंतनीय स्थिति

प्रदेश में गधों की संख्‍या कम होना चिंतनीय है। यह कम होते जा रहे हैं बल्कि विलुप्‍त होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। प्रदेश में केवल 3052 गधे हैं। जबकि 1997 में प्रदेश में 49 हजार 289 गधे थे। प्रदेश के 9 जिलों में एक भी गधा नहीं है। अनूपपुर, दमोह, बालाघाट, डिंडौरी, हरदा, मंडला, सिवनी, निवाड़ी, उमरिया में एक भी गधा नहीं है। महाकोशल क्षेत्र के जबलपुर संभाग में जबलपुर, कटनी में चार गधे, शहडोल जिले में चार गधे हैं। वहीं नर्मदापुरम में सबसे अधिक 335 गधे, छतरपुर जिले में 232, मुरैना में 228, दतिया में 183, श्‍योपुर में 176 गधे हैं।

अन्‍य पशुओं की यह है स्थिति

पशुगणना में सबसे अधिक गोवंश पाए गए हैं। प्रदेश में 1.57 करोड़ गोवंशीय पशु, 1.02 करोड़ भैंसवंशीय पशु, 1.09 करोड़ बकरी, 558324 भेड़, 9971 घोड़े, 972 खच्‍चर, 2896 ऊंट, 89177 सूअर पाए गए।

गधे क्‍यों कम हो रहे

पशुपालन विभाग इस बात पर चिंतन कर रहा है कि गधे कम क्‍यों हो रहे हैं। इनकी संख्‍या बढ़ाने के लिए अध्‍ययन किया जा रहा है। हालांकि लोग अब इनका उपयोग कम करने लगे हैं क्‍योंकि अन्‍य मैकेनिकल संसाधनों की उपलब्‍धता है। ग्रामीण इलाकों में इनका उपयोग इंटों की ढुलाई में होता था लेकिन अब लोग ट्रैक्‍टर वा अन्‍य वाहनों का उपयोग करने लगे हैं। इससे इनकी उपयोगिता कम होती जा रही है।

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