

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत ज्ञान वैराग्य के सहित भक्ति का भण्डार है। भक्ति का अभिप्राय है भगवान से पूर्ण विश्कारपूर्वक प्रेम हो जाना, इसलिए “सदा सेव्या सदा सेव्या श्रीमद् भगवती कथा”— सदा श्रवण करते रहना चाहिए। मनुष्यतन प्राप्त करने की सार्थकता इसी में है। भगवान अपने भक्त की सदा रक्षा करते हैं, रखवारी करते हैं— “करौं सदा तिन्हकै रखवारी, जिमि बालक राखै महतारी।”

स्वामी जी ने भावपूर्ण ढंग से ज्ञान, वैराग्य व भक्ति के प्रसंग का वर्णन करते हुए देवर्षि नारद और सनकादिकों के संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भक्ति कोई मूर्तिमान सत्ता नहीं, बल्कि भगवान के चरणों से निर्मल प्रेम ही भक्ति का स्वरूप है।
व्यास पीठ का पूजन कमलेश शुक्ल, शैलेन्द्र ज्योतिषी, सुनित, श्रद्धा, वंदना और शिखा ने किया। तुलसी-शालिग्राम विवाहोत्सव में मंत्री राकेश सिंह, श्याम साहनी, के.के. बस्सी, डॉ. संदीप मिश्रा, राजेन्द्र यादव, संदीप जैन गुड्डा, आशीष शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।