एआई द्वारा तैयार फर्जी प्रिस्क्रिप्शन से जन-स्वास्थ्य को गंभीर खतरा

नई दिल्ली। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने एआई के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से फर्जी चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन तैयार किए जा रहे हैं और उनके आधार पर एंटीबायोटिक्स, साइकोट्रोपिक दवाएं, ओपिऑइड्स तथा शेड्यूल H एवं X की दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री की जा रही है, जो जन-स्वास्थ्य के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

मीडिया जांच में हुआ खुलासा

AIOCD के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे एवं महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि हालिया मीडिया जांच, जिसमें एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की रिपोर्ट भी शामिल है, से यह उजागर हुआ है कि काल्पनिक अस्पतालों के नाम और मनगढ़ंत विवरणों वाले एआई-जनित प्रिस्क्रिप्शन कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा स्वीकार किए जा रहे हैं।

संगठन का आरोप है कि अवैध ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म सरकारी अधिसूचनाओं GSR 817(E) एवं GSR 220(E) का दुरुपयोग करते हुए Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों को दरकिनार कर रहे हैं।

मानवीय सत्यापन का अभाव

ऑफलाइन केमिस्टों के विपरीत, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रभावी मानवीय सत्यापन की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में एआई द्वारा तैयार किए गए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन की पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है। इससे नियंत्रित दवाओं की अनियंत्रित बिक्री की आशंका बढ़ जाती है, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

कड़ी कार्रवाई की मांग

AIOCD ने प्रधानमंत्री एवं डीसीजीआई से आग्रह किया है कि जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए GSR 817(E) एवं GSR 220(E) को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही अवैध ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म को बंद करने और एआई-जनित प्रिस्क्रिप्शन को देशभर में अवैध घोषित करने की मांग की गई है।

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