
अधिक मास का विशेष संयोग
यह एक अद्भुत संयोग है कि वर्ष 2007 में भी इसी तिथि से अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) प्रारंभ हुआ था। इस वर्ष ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। बीच में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा।
अधिक मास क्या है?
हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास का आगमन सूर्य और चंद्रमा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए होता है। इसे मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व है। इस मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती और यह लगभग 32 माह के अंतराल में आता है।
धार्मिक महत्व और मान्यताएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब इस अतिरिक्त मास को अशुद्ध माना गया, तब भगवान विष्णु ने इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ नाम देकर इसकी महिमा बढ़ाई। इस मास में की गई पूजा, भक्ति, जप और तप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस दौरान भागवत कथा का पाठ और भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
अधिक मास में क्या करें और क्या न करें
भविष्य पुराण के अनुसार इस मास में तीर्थ स्नान, व्रत, उपवास, देव दर्शन जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। वहीं विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, उपनयन, प्राण प्रतिष्ठा जैसे मांगलिक कार्य इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं।
‘बड़ा मंगल’ का महत्व
इस बार ज्येष्ठ मास लंबा होने के कारण कुल आठ मंगलवार पड़ रहे हैं, जिन्हें ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है। ये सभी दिन भगवान हनुमान को समर्पित होते हैं। मान्यता है कि इसी मास में भगवान राम और हनुमानजी का मिलन हुआ था, इसलिए इन मंगलवारों का विशेष महत्व होता है।
आध्यात्मिक लाभ
अधिक मास में विधिपूर्वक पूजा-पाठ, संयम और साधना करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मास में की गई भक्ति का फल मृत्यु के बाद भी शुभ फल प्रदान करता है।