धनतेरस के पहले पुष्य नक्षत्र 2025 में बन रहा शुभ योग, जानें क्यों खास है यह दिन

14 और 15 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र, दो दिनों तक रहेगा विशेष शुभ मुहूर्त

हिंदू ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को विशेष महत्व प्राप्त है। इसे ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है और यह भगवान बृहस्पति से संबंधित है, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। दीपावली से कुछ दिन पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र हर वर्ष विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वर्ष 2025 में यह नक्षत्र 14 और 15 अक्टूबर को बन रहा है, जो दिवाली की तैयारियों और निवेश के लिए अत्यंत अनुकूल माना जा रहा है।

दो दिनों तक रहेगा शुभ योग

अचार्य सौरभ उपाध्‍याय ने बताया कि इस वर्ष पुष्य नक्षत्र का शुभ समय मंगलवार 14 अक्टूबर को सुबह 11:54 बजे से प्रारंभ होगा और बुधवार 15 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे तक चलेगा। इस दौरान खरीदारी, निवेश और शुभ कार्यों के लिए भरपूर समय उपलब्ध रहेगा। दिवाली 20 अक्टूबर को और धनतेरस 18 अक्टूबर को है, ऐसे में पुष्य नक्षत्र का यह योग त्योहारों से पहले विशेष महत्त्व रखता है।

मंगल पुष्य और बुध पुष्य का संयोग

इस वर्ष पुष्य नक्षत्र दो दिनों में बन रहा है- मंगलवार और बुधवार को। मंगलवार को पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र ‘मंगल पुष्य’ कहलाता है, जो भूमि, वाहन और संपत्ति से संबंधित कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। वहीं बुधवार को बनने वाला ‘बुध पुष्य’ ज्ञान, शिक्षा, व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल माना जाता है। यह दुर्लभ योग शुभ परिणामों की संभावना को और बढ़ा देता है।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • 14 अक्टूबर: सुबह 11:54 बजे से मध्यरात्रि तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
  • 15 अक्टूबर: प्रातः 06:22 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक खरीदारी व शुभ कार्यों का उत्तम समय है।

चौघड़िया के अनुसार इस अवधि में चर, लाभ, अमृत और शुभ योग का मेल रहेगा।

पुष्य नक्षत्र में क्या करें

पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी को स्थायी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन सोना, चांदी, भूमि, वाहन और गृह संबंधी वस्तुएं खरीदना अत्यंत फलदायी होता है। इस अवसर पर लोग अपने बहीखाते नवीनीकृत करते हैं और नई योजनाओं की शुरुआत भी करते हैं।

धार्मिक दृष्टि से इस नक्षत्र में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

धन और समृद्धि से जुड़ी मान्यताएं

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी से घर में देवी लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। यह नक्षत्र स्वयं देवी लक्ष्मी का जन्म नक्षत्र भी माना जाता है। यही कारण है कि धनतेरस और दिवाली से पहले लोग विशेष रूप से इस शुभ समय में खरीदारी करते हैं ताकि वर्षभर घर में सौभाग्य और सम्पन्नता बनी रहे।

निवेश और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय

पुष्य नक्षत्र के दौरान नए व्यापार की शुरुआत, वित्तीय निवेश या नई संपत्ति की योजना बनाना अत्यंत लाभदायक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र में किया गया कोई भी सकारात्मक कार्य दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व प्रदान करता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय आकलनों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी प्रकार के निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। पोर्टल इसकी पुष्टि नहीं करता।
Back to top button