VIDEO: ड्रोन से बुझाई जाएगी जंगल की आग, “एरियल फायर फाइटिंग” का अनोखा प्रयोग

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। वनाग्नि नियंत्रण के लिए ड्रोन एवं फायर रिटार्डेंट की मदद से “एरियल फायर फाइटिंग” का प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया। दक्षिण पन्ना वनमण्डल एवं राज्य वन अनुसंधान संस्थान (SFRI) के संयुक्त प्रयास से शाहनगर वन परिक्षेत्र में आधुनिक तकनीक आधारित इस अनूठे प्रयोग ने वन अग्नि प्रबंधन के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है।

दुर्गम जंगलों में अब आसमान से पहुंचेगी मदद

गर्मी के मौसम में दूरस्थ एवं दुर्गम वन क्षेत्रों में लगने वाली आग पर समय रहते नियंत्रण पाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होता है। कई बार वन कर्मियों को जान जोखिम में डालकर आग के बीच पहुंचना पड़ता है। वर्तमान में आग बुझाने के लिए फायर बीटिंग, काउंटर फायर एवं लीफ ब्लोअर जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।

ऐसे में ड्रोन अथवा हेलीकॉप्टर आधारित “एरियल फायर फाइटिंग” तकनीक वन कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ आग की शुरुआती अवस्था में त्वरित नियंत्रण स्थापित करने का प्रभावी विकल्प बन सकती है।

ड्रोन से किया गया फायर रिटार्डेंट का छिड़काव

प्रयोग के दौरान ड्रोन के माध्यम से लगभग 0.1 हेक्टेयर क्षेत्र में “मोनो अमोनियम फॉस्फेट (MAP)” आधारित फायर रिटार्डेंट का नियंत्रित छिड़काव किया गया। यह रसायन आग की तीव्रता कम करने और उसके फैलाव को रोकने में सहायक माना जाता है।

वैज्ञानिक अध्ययन के बाद तय होगी उपयोगिता

वन विभाग के अनुसार यह केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत इसकी व्यवहारिक उपयोगिता, लागत, प्रभावशीलता तथा पर्यावरणीय प्रभावों का परीक्षण किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न मौसमों में कई परीक्षण, फील्ड विजिट एवं मिट्टी-जल सहित अन्य नमूनों का विश्लेषण किया जाएगा। अध्ययन के बाद ही यह तय किया जाएगा कि यह तकनीक आर्थिक, पर्यावरणीय एवं व्यवहारिक दृष्टि से कितनी प्रभावी साबित हो सकती है।

वन्यजीव संरक्षण में भी मिलेगी मदद

वन विभाग ने बताया कि यदि यह तकनीक सफल पाई जाती है, तो भविष्य में इसका उपयोग दुर्गम वन क्षेत्रों, तीव्र वनाग्नि प्रभावित इलाकों एवं संवेदनशील वन्यजीव आवासों में किया जा सकेगा। इससे जंगलों के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ता वन विभाग

दक्षिण पन्ना वन विभाग का यह प्रयास वन अग्नि प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों के सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल भविष्य में देशभर के वन क्षेत्रों के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है।

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