
भोपाल। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के आधीन राष्ट्रीय महत्व का संस्थान जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान ( जिपमर) पुडुचेरी ने पत्र क्रमांक जेआईपी/पीआरओ/ न्यूज/055/2025-26 जारी करते हुये एमबीबीएस व बीएएमएस को एकीकृत कर दोहरी डिग्री कार्यक्रम शुरु करने से इंकार किया है। इसके अलावा कहा है कि केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही लोग भरोसा करें।
हाल ही में एमबीबीएस चिकित्सकों का राष्ट्रीय संगठन इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस दोहरी इण्टीग्रेटेड डिग्री का विरोध करते हुये इससे मरीजों को नुकसान की बात कही थी। वहीं आयुष डॉक्टरों के राष्ट्रीय संगठन आयुष मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) ने पाठ्यक्रम शुरु करने पर सहमति जतायी थी।
जिपमर द्वारा इंकार करने से कहीं न कहीं आयुर्वेद डॉक्टर्स निराश जरूर हुये हैं। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राकेश पाण्डेय का कहना है कि अब समय आ गया है कि आयुर्वेद -आयुष को एलोपैथी के बराबर बजट देने के साथ ही डॉक्टरों की संख्या के आधार पर रिजर्वेशन व सर्वाधिकार तय करे सरकार। जिस पैथी के जितने ज्यादा डॉक्टर्स हों वैसा अधिकार तय हो। ज्ञात रहे कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, नईदिल्ली, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, बिहार प्रदेश समेत देशभर में आयुष के आठ लाख से ज्यादा डॉक्टर्स हैं तथा दो लाख से ज्यादा छात्र आयुष मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत हैं।
सरकार वा जिपमर पुनः विचार करें
अब ये सरकार को सोचना है कि जनमानस के हितार्थ यह इण्टीग्रेटेड मेडिकल डिग्री प्रारंभ करना है या नहीं। शेष देशभर के 8 लाख से ज्यादा आयुष डॉक्टर्स सरकार के साथ में हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार व जिपमर मिलकर पुन: विचार करें। वैसे सरकार चाहे तो देशभर के एम्स में भी इसे प्रारंभ किया जा सकता है।
– डॉ राकेश पाण्डेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता- आयुष मेडिकल एसोसिएशन