
जबलपुर। भगवान महादेव के मस्तक पर चंद्र सुशोभित रहता है। चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है और शीतलता भगवान भोलेनाथ को अतिप्रिय है। सोम का दूसरा अर्थ सौम्यता भी होता है। अर्थात् जिसमें शीतलता है, जिसमें सौम्यता है, वह भगवान शिव को प्रिय है। भगवान भोलेनाथ की शरण में जाने के बाद कुटिल चंद्रमा की तरह यह जीव भी अपने आचरण में शीलता और सौम्यता को प्राप्त कर लेता है।संसार तुम्हारे विरुद्ध खड़ा हो जाए तो भी चिंता मत करना। बहुधा लोगों को लगता है कि हम बहुत भोले हैं, इसलिए दूसरों द्वारा ठग लिए जाते हैं। आप अपने भोलेपन से बिल्कुल भी परेशान न हों क्योंकि भोले लोगों के नाथ ही तो भोलेनाथ हैं। भोले लोगों के साथ भोलेनाथ अवश्य खड़े रहते हैं। आपकी चतुराई नहीं, अपितु आपका भोलापन ही महादेव को रिझा पाता है।
उक्त उद्गार पावन श्रावण मास में नरसिंह मंदिर में श्रीमद् जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने नर्मदेश्वर महादेव के रूद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजन अर्चन आरती में कहे।
नर्मदेश्वर महादेव को अपराजिता, गौकर्ण, अकौआ, धतूरा, बिल्वपत्र, गुलाब सहित विविध पुष्पों से श्रृंगारित किया गया।
पूजन अर्चन व आरती में लालमन मिश्र, कामता शास्त्री, रामफल शास्त्री, ब्रह्मचारी हिमांशु, प्रियांशु, पवन सहित कई भक्तों की उपस्थिति रही।
नरसिंह मंदिर में प्रतिदिन परम पूज्य महाराज जी के सानिध्य में प्रातः 10 बजे से महारुद्राभिषेक पूजन का आयोजन किया गया है।