
जबलपुर। हमारा धर्म और नियम “प्रभु प्रेम” से भरा हुआ होना चाहिए, जिसकी अनुभूति हमें और हमारे आस-पास रहने वालों को भी होना चाहिए। अपने कर्म, व्यवहार, वाणी और भाव से ईश्वर के प्रेम को प्रकट करने वाला ही सच्चा “भक्त” होता है। भगवान की भक्ति सदैव हमारा कल्याण और मंगल करती है।
भक्तों की भक्ति से बंधे भगवान भी उनकी हर असंभव मांग को पूरा करने के लिए हर क्षण रूप बदलते हैं। परिवार में आपसी सहयोग और सामंजस्य स्थापित करना सभी सदस्यों का कर्तव्य है।
रूक्मिणी-कृष्ण विवाह का आध्यात्मिक महत्व बताया
श्रीकृष्ण ने रूक्मिणी के प्रेम और भक्ति के मोह में बंधकर उनसे परिणय सूत्र में बंधे। रूक्मिणी लक्ष्मी स्वरूपा हैं और लक्ष्मी-नारायण सदा सर्वदा एक हैं।
उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 मई तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस में श्रीकृष्ण-रूक्मिणी मंगल प्रसंग के दौरान व्यक्त किए।
दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी में आयोजित हो रहा ज्ञान यज्ञ
श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी, हाथीताल जबलपुर में किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा का श्रवण कर रहे हैं।
व्यास पीठ पूजन एवं आरती में शामिल हुए श्रद्धालु
श्रीमद्भागवत महापुराण में व्यास पीठ का पूजन, अर्चन एवं आरती यजमान कपूरचंद्र केसरवानी, हरिवंश निर्मला केसरवानी, बी बी शर्मा (गायत्री परिवार), शरद काबरा, विष्णु पटेल, रामलाल रजक, नारायण दास शांति देवी केसरवानी, कुंजविहारी केसरवानी, हरि शंकर कान्ति केसरवानी, हिंद लाल केसरवानी, शिवदीन केसरवानी, रामरूप (ज्ञानी) रामबाई केसरवानी, कन्हैयालाल केसरवानी, मूलचंद्र शाकुंतला केसरवानी, राम कृपाल केसरवानी, राम दिनेश सेन सुभद्रा सेन, बनवारी लाल गुलाब कली केसरवानी, केदारनाथ गीता केसरवानी, मिश्री लाल शीला केसरवानी, हरिवंश सुनीता केसरवानी, प्रदीप सरोज केसरवानी, प्रेम लाल गुप्ता बेला कली, यमुनी प्रसाद अर्चना केसरवानी द्वारा किया गया।