
जबलपुर। पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्री दत्त भजन मंडळ द्वारा आयोजित पंच दिवसीय दत्तयज्ञ के चौथे दिन का प्रारंभ प्रातःकाल में दत्त महात्म्य एवं गुरुचरित्र ग्रंथों के वाचन से हुआ।

वैदिक विधि से हुआ यज्ञ का शुभारंभ
यज्ञ का प्रारंभ नवग्रह पीठ के पूजन, वैदिक ऋचाओं के गायन और कलश पूजन के साथ किया गया। यज्ञाचार्य आर्वीकर गुरुजी के सान्निध्य में संपूर्ण अनुष्ठान संपन्न हुआ।
यज्ञ कुंड में अर्पित की गई आहुतियां
मुख्य यजमान सौ. माधुरी नाजवाले, श्री सुनील नाजवाले सहित सहयजमान अॅड. श्री पद्मनाभ पाटणकर, प्रतीक जोशी, राजीव गणेशपुरकर, आशुतोष कात्रे, डॉ. श्री शिरीष नाईक, श्री सुबोध गोसावी, श्री प्रशांत लोणकर, डॉ. श्री चैतन्य ओक, प्रशांत मुळे, मनोज हर्डीकर, डॉ. जन्मेजय जामदार, कीर्ती अभिलाष पांडे, पार्षद प्रतिभा विध्येश भापकर ने यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित कीं।

मंत्रोच्चार से गुंजा पूरा परिसर
दत्त गायत्री मंत्र “ॐ दिगंबराय विद्महे योगेश्वराय धीमहि तन्नो दत्त: प्रचोदयात”, “ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा”, “श्री आदित्यांतर्गत नमः”, “ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये इदं न मम॥” जैसे मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
दत्तात्रेय उपासना का महत्व
ज्ञात हो कि भगवान दत्तात्रेय अत्रि और अनसूया के पुत्र हैं तथा स्मर्तुगामी कहलाते हैं। पुरुषोत्तम मास में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त उपासना जब यज्ञ के माध्यम से की जाती है, तो यज्ञकर्ता को अभ्युदय एवं निःश्रेयस की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म में यज्ञ की परंपरा रही है, जिसका निर्वाह प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।
श्रद्धालुओं ने दी सेवाएं
यज्ञकार्य में प्रतिदिन पार्षद प्रतिभा भापकर, श्वेता गोडबोले, प्राजक्ता प्रवीण विप्रदास, छाया श्रीकांत बापट, तेजश्री मनीष नाजवाले, रंजना भास्कर वर्तक, अभय गोरे, विश्वास पाटणकर, अजय फाटक, सुनील देशपांडे, बीएस टांगसाळे, सुनील परांजपे, विनय मैराळ, प्रमोद परांजपे, विलास ताम्हनकर अपनी बहुमूल्य सेवाएं दे रहे हैं।
आज होगी पूर्णाहुति और महाप्रसाद वितरण
आयोजन के अंतिम दिन यज्ञ की पूर्णाहुति एवं महाप्रसाद वितरण किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।