
जबलपुर। मध्य प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (एमपीपीजीसीएल) के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट क्षमता की नई सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना ने 10 जून को एक अहम मील का पत्थर पार कर लिया। परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से मुख्य बॉयलर क्षेत्र में पहले पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) पोर की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है, जिससे अब परियोजना की नींव निर्माण का कार्य तेज गति से आगे बढ़ेगा।
बॉयलर की मजबूत नींव की शुरुआत
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह की निगरानी में शुरू हुए इस कार्य के दौरान सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के मुख्य अभियंता सुशील लिल्लोरे सहित अन्य वरिष्ठ अभियंता एवं कार्मिक उपस्थित रहे। थर्मल पावर प्लांट का बॉयलर अत्यंत विशाल और भारी संरचना होती है, जिसके लिए मजबूत और स्थिर नींव आवश्यक होती है। मुख्य बॉयलर क्षेत्र में किया गया यह पहला पीसीसी पोर उसी नींव की आधारभूत परत है। इसके पूर्ण रूप से सेट होने के बाद आरसीसी संरचना और भारी स्टील कॉलम स्थापित किए जाएंगे।
सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष फोकस
पीसीसी पोरिंग कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और निर्माण गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कंक्रीट की मिक्सिंग, ग्रेडिंग और पोरिंग प्रक्रिया की आधुनिक प्रयोगशालाओं तथा स्वचालित निगरानी प्रणालियों के माध्यम से लगातार जांच की जा रही है, ताकि परियोजना की नींव पूरी तरह मजबूत और टिकाऊ बन सके।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
पुरानी और बंद हो चुकी इकाइयों के स्थान पर स्थापित की जा रही 660 मेगावाट क्षमता की यह सुपरक्रिटिकल यूनिट आधुनिक तकनीक पर आधारित, अधिक दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल होगी। यह परियोजना प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ मध्य प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निर्माण के अगले चरण की ओर बढ़ी परियोजना
मुख्य बॉयलर क्षेत्र में पहले पीसीसी पोर की शुरुआत इस बात का संकेत है कि परियोजना अब निर्माण के अगले चरणों की ओर तेजी से बढ़ रही है। सिविल कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना मैकेनिकल इरेक्शन चरण में प्रवेश करेगी, जिससे इसके निर्धारित समय पर पूरा होने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।