
जबलपुर। महादेव रौद्र रूप में भी संदेश देते हैं। शांत रहो, लेकिन आपकी शांति अधर्म को प्रश्रय देती हो तो वहां पर शांति से ज्यादा महत्वपूर्ण क्रोध हो जाता है। भगवान शिव के रुद्र रूप का यही रहस्य है। द्वेषवश किसी से किया गया क्रोध जहां अनिष्टकारी और अहितकारी होता है, वहीं किसी के हित में किया गया क्रोध स्वयं के लिए भी शुभकारी और हितकारी होता है। क्रोध किया यह महत्वपूर्ण नहीं, अपितु क्रोध क्यों किया यह महत्वपूर्ण है।

लोकहित, लोकमंगल और धर्म को ग्लानि से बचाने के लिए किया गया क्रोध भी कल्याणकारी होता है। यही भगवान शिव के रौद्र रूप का संदेश है। भगवान शिव तो कल्याण स्वरूप हैं, इसलिए उनका रुद्र रूप भी कल्याणकारक ही है। सामर्थ्यवान होकर अन्याय और अनीति को सहते रहना, अन्याय को बढ़ावा देने जैसा ही है। लोकमंगल, लोकहित और धर्म रक्षार्थ किया गया क्रोध भी जीव के शिव बनने का एक मार्ग है।
उक्त उद्गार जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने नरसिंह मंदिर में श्रावण मास महोत्सव के अंतर्गत श्रावण मास शिवरात्रि एवं प्रदोष व्रत के अवसर पर आयोजित रुद्राभिषेक के दौरान व्यक्त किए।
श्रावण मास में प्रतिदिन रुद्राभिषेक और महाआरती
श्रावण मास के दौरान नरसिंह मंदिर, शास्त्री ब्रिज में प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से जगतगुरु महाराज जी के सानिध्य में रुद्राभिषेक, महापूजन, अभिषेक एवं महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान नर्मदेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन कर रहे हैं।
महाभिषेक में श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
नर्मदेश्वर महादेव के महाभिषेक में जगदीश गीता साहू, पार्षद प्रतिभा विध्येश भापकर, इंद्रकुमार साधना साहू, जागृति संजय साहू, राजेंद्र इंदू प्यासी, लोकराम कोरी, प्रकाश मिश्रा, रेखा मिश्रा, उमेश तिवारी, एस.वी. मिश्रा, आचार्य रामफल शास्त्री, कामता शास्त्री, लालमन मिश्रा, हिमांशु, प्रियांशु सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।