
जबलपुर। बजरंग मठ सुपाताल में मानस पाठ के 59 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पूज्य विश्वनाथ पुरी महाराज के पावन संरक्षण में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। वार्षिक उत्सव के चतुर्थ दिवस आयोजित मानस प्रवचन माला में व्यास पीठ पर विराजमान जगतगुरु नरसिंह देवाचार्य जी महाराज, नरसिंह मंदिर ने जनमानस को संबोधित किया।
भगवान श्रीराम के यशगान से शुरू हुआ प्रवचन
प्रवचन का प्रारंभ महाराज श्री ने भगवान श्रीराम के यशगान से किया। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई “राम राज बैठे त्रिलोका। हर्षित भए गए सब सोका॥” का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन संदेश को सामने रखा।
महाराज श्री ने कहा कि एक बार भगवान श्रीराम ने सभी समाज को संबोधित करने के लिए सभा बुलाई और मधुर वचनों में जीवन के सहज मार्ग का संदेश दिया—
“सहज सुभाय न मन कुटिलाई।
यथा लाभ संतोष सदाई॥”
सरलता और सहजता के साथ जीवन जीने का संदेश
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में सरलता और सहज स्वभाव के साथ रहना चाहिए। मान-सम्मान और अपमान की परिस्थितियों में भी समान भाव बनाए रखना चाहिए। जीवन में जैसा और जितना प्राप्त हो, उसमें संतोष रखते हुए प्रसन्नचित रहना ही जीवन को आनंदमय बनाता है।
महाराज श्री ने कहा कि जब हमें गुरुवर का सानिध्य और उनका प्रेम-स्नेह प्राप्त है तो हमें किसी से रूठने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी में उसी परम सत्ता का स्वरूप समाया हुआ है, इसलिए कौन अपना और कौन पराया—इस भाव से ऊपर उठकर सभी के प्रति प्रेम और सद्भाव रखना चाहिए।
सबमें ब्रह्म का स्वरूप देखने का संदेश
उन्होंने कहा कि “सब ब्रह्ममय है”, इसलिए किसी से विरोध नहीं करना चाहिए। जीवन में प्रेम, सहजता, संतोष और सद्भाव के भाव को अपनाने से मन को शांति मिलती है।
दादा भगवान बजरंग की महिमा का किया बखान
प्रवचन के दौरान पूज्य दादा भगवान जी के दिव्य प्रभाव की चर्चा करते हुए महाराज श्री ने कहा कि हम भगवान श्रीराम की कथा सुनाने आए हैं, लेकिन यहां दादा भगवान बजरंग जो चाहते हैं, वही होता है। उन्होंने गुरुवर से प्रार्थना करते हुए कहा कि ऐसी कृपा बनाए रखें और अपनी सेवा में लगाए रखें।
गुरु महिमा का हुआ बखान
इस अवसर पर प्रवचन के दौरान गुरु महिमा का भी बखान हुआ। महाराज श्री ने कहा कि जिसका संबंध राम प्यारे से हो जाता है, उसके जीवन में हर घड़ी आनंद ही आनंद रहता है।
बड़ी संख्या में भक्तगण रहे उपस्थित
वार्षिक उत्सव के इस अवसर पर पंडित दैवज्ञ अरुण शर्मा, भागीरथ शर्मा, पवन स्थापक, बाबू शंकर सोनकर, बलदेव आनंद, भोला राम खत्री सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।