जीवन में सदैव करना चाहिए निष्काम कर्म: जगतगुरु स्वामी नरसिंह देवाचार्य

जबलपुर। श्री गीता धाम, गौरीघाट में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस परम पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में संघर्ष, कर्म और निष्काम भाव का महत्व बताते हुए कहा कि हर इंसान का अपना कुरुक्षेत्र होता है। जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है। इसलिए मुश्किलों से भागने के बजाय उनका डटकर सामना करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इतिहास वही लोग रचते हैं, जो परिस्थितियों और हालात के आगे नहीं झुकते। जीवन में आने वाली चुनौतियां मनुष्य को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाने के लिए आती हैं। व्यक्ति को अपने संघर्ष से स्वयं लड़ना होगा, क्योंकि जीत उसी की होती है, जो आखिर तक डटा रहता है।

हर व्यक्ति का अपना कुरुक्षेत्र

जगतगुरु स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने कर्तव्य का बोध कराया था, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य के जीवन में भी एक कुरुक्षेत्र होता है। यह कुरुक्षेत्र उसके सामने आने वाली परिस्थितियों, चुनौतियों और संघर्षों के रूप में होता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएं और कठिनाइयां आती रहेंगी, लेकिन उनसे घबराकर पीछे हटना समाधान नहीं है। मनुष्य को धैर्य, साहस और विश्वास के साथ अपने कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। संघर्षों का सामना करते हुए आगे बढ़ने वाला व्यक्ति ही अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

निष्काम भाव से कर्म करने का संदेश

कथा के दौरान जगतगुरु ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए। कर्म करना मनुष्य के हाथ में है, लेकिन कर्म के परिणाम को लेकर अत्यधिक चिंता करना उचित नहीं है। व्यक्ति को अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करते रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने निष्काम भाव से कर्म करते हुए जीवन व्यतीत करने का संदेश दिया। यदि मनुष्य अपने कर्म को ईश्वर को समर्पित भाव से करता है तो उसके भीतर परिणाम को लेकर भय और चिंता कम होती है तथा वह अपने कर्तव्य को अधिक एकाग्रता के साथ पूरा कर पाता है।

भागवत कथा जीवन को देती है सही दिशा

जगतगुरु स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह जीवन को सार्थक बनाने की दिशा दिखाने वाला आध्यात्मिक माध्यम है। कथा के श्रवण से मनुष्य को अपने जीवन में धर्म, कर्म, भक्ति और सदाचार के महत्व को समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मनुष्य को अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। भगवान के प्रति आस्था रखते हुए निरंतर कर्म करते रहना चाहिए। यही भाव जीवन को संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

कलश यात्रा के साथ हुआ कथा का शुभारंभ

श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के शुभारंभ से पूर्व भगवान योगेश्वर एवं मां नर्मदा जी का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन शामिल हुए। धार्मिक वातावरण में निकली शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति भाव दिखाई दिया।

कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का विधिवत शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान का पूजन-अर्चन कर कथा के सफल आयोजन और सभी के कल्याण की कामना की। श्री गीता धाम, गौरीघाट में कथा के आयोजन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

21 से 27 अगस्त तक होगा भागवत कथा सप्ताह

श्री गीता धाम, गौरीघाट में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन 21 से 27 अगस्त तक किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन शाम 3 बजे से आयोजित होगी। नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त परिवार ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा स्थल पर उपस्थित होकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करने की अपील की है। कथा सप्ताह के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति के साथ जीवन को बेहतर और सार्थक बनाने के विभिन्न मार्गों का संदेश प्राप्त होगा।

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