
जबलपुर। शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुति, बांसुरी की मधुर तान और भजन-अभंग की भक्तिपूर्ण वाणी ने शनिवार को शहीद स्मारक सभागार में संगीत रसिकों को भावविभोर कर दिया। अवसर था संस्कारधानी की कला साधिका स्व. श्रीमती चन्द्रप्रभा पटैरिया की स्मृति में आयोजित संगीत समारोह का। कार्यक्रम का आयोजन संस्कारधानी की प्राचीनतम संस्था संगीत समाज जबलपुर की ओर से किया गया।
संगीत संध्या की शुरुआत डॉ. विवेक कर्महे के शास्त्रीय गायन से हुई। उन्होंने राग मुल्तानी में पारंपरिक बंदिश ‘गोकुल गांव का छोरा, बरसाने की नार’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को सुरों की गहराई से परिचित कराया। इसके बाद तीनताल मध्यलय में ‘हमसे तुम रार करोगी रे’ और द्रुत एकताल में ‘नैनन में आन बान’ की प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं। उनके साथ तबले पर मुंबई से आए यशवंत वैष्णव और हारमोनियम पर इंदौर के दीपक खसरावल ने सधी हुई संगत की। तानपुरे पर तुषार और दीपांशु रहे।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ जस्टिस पी.पी. नावलेकर, जस्टिस डी.एम. धर्माधिकारी, कैलाश गुप्ता, कमल तलरेजा, संरक्षक डॉ. जितेंद्र जामदार और डॉ. माणिक पांसे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मां सरस्वती का पूजन तथा स्व. चन्द्रप्रभा पटैरिया के तैलचित्र पर माल्यार्पण भी किया गया। श्रीमती गीता शरत तिवारी ने स्व. पटैरिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भावांजलि अर्पित की।
बांसुरी की तान ने मोहा मन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में पुणे से आए बांसुरी वादक सम्यक पाराशर ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को सुरमय कर दिया। उनके साथ इंदौर के प्रखर विजयवर्गीय ने पखावज और क्षितिज श्रीवास्तव ने मंजीरा पर संगत की। डॉ. विवेक कर्महे के साथ रस गुरुकुल के कलाकारों अंतरा दुबे और अनिकेता पटैरिया ने भक्ति गीत एवं अभंग प्रस्तुत किए। भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
1939 में हुई थी संगीत समाज की स्थापना
संगीत समाज जबलपुर के अध्यक्ष बिपिन बिहारी ब्यौहार ने संस्था की गतिविधियों और गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1939 में स्थापित संगीत समाज जबलपुर के मंच पर देश के तीन भारत रत्न सहित लगभग 60 से अधिक पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं।
कलाकारों का स्वागत संस्था के सचिव डॉ. उमाशंकर शर्मा, सह सचिव डॉ. संजय वर्मा, प्रदीप रानाडे, शंकर बोस, प्रद्युम्न कायंदे और संजीव सिन्हा आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुश्री जामदार ने किया। आयोजन को सफल बनाने में संजय दुल्हानी, नीलांगी कलंतरे सहित संस्था के अन्य सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में प्रो. एच.बी. पालन, मुरलीधर नागराज, अखिलेश सप्रे, अरविंद नायक, दिलीप कोरी, सुब्रतो सोम सहित बड़ी संख्या में संगीत रसिक उपस्थित रहे।