Islamabad talks: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता फेल, 21 घंटे वार्ता चली लेकिन सकारात्‍मक परिणाम तक नहीं पहुंची

अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता 21 घंटे तक चली, लेकिन यह किसी सकारात्मक परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जीडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका लौट गए।

अमेरिका और ईरान के बयान

जीडी वेंस ने कहा कि समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को यह वादा करना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। वहीं ईरान की ओर से कहा गया कि कई मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन 2-3 अहम बिंदुओं पर मतभेद के कारण वार्ता सफल नहीं हो सकी।

ट्रंप का कड़ा रुख

शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए ईरान के खिलाफ समुद्री घेराबंदी जैसे विकल्पों का संकेत दिया।

47 साल बाद हुई सीधी बातचीत

47 साल बाद अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने बातचीत हुई। इससे पहले 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के नेताओं के बीच इस तरह की वार्ता आयोजित हुई थी।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नेता

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जीडी वेंस ने नेतृत्व किया, जबकि ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने प्रतिनिधित्व किया। पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक भी इस वार्ता में शामिल रहे।

इस्लामाबाद में हुआ आयोजन

शांति वार्ता के लिए अमेरिका और ईरान का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचा था। पाकिस्तान ने इस वार्ता को “इस्लामाबाद टॉक” नाम दिया। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने किया।

वार्ता में शामिल अन्य प्रतिनिधि

अमेरिका की ओर से जीडी वेंस के साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे। वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराधची और उप विदेश मंत्री मजीद तख्त खांची वार्ता का हिस्सा रहे।

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